09/04/26

हिमाचल पंचायत चुनाव: अवैध कब्जेधारियों और नशा तस्करों पर गिरी गाज; चुनाव लड़ने पर लगा प्रतिबंध

जे कुमार हिमाचल पंचायत चुनाव: अवैध कब्जेधारियों और नशा तस्करों पर गिरी गाज; चुनाव लड़ने पर लगा प्रतिबंध

शिमला/सोलन, 9 अप्रैल 2026: हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और अपराध मुक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। नए नियमों के अनुसार, अब सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले और नशा तस्करी (Drug Trafficking) के मामलों में संलिप्त आरोपी आगामी पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। प्रशासन का यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते नशे के कारोबार और अतिक्रमण पर लगाम लगाने की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव माना जा रहा है।

अयोग्यता के नए प्रावधान:

हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम में किए गए संशोधनों के तहत, चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए चरित्र प्रमाण पत्र और 'नो-ड्यूज' के साथ-साथ अब यह स्व-घोषणा करना अनिवार्य होगा कि उनके खिलाफ नशा तस्करी (NDPS एक्ट) या अवैध कब्जे का कोई मामला लंबित या सिद्ध नहीं है। यदि किसी व्यक्ति पर सरकारी जमीन हथियाने का दोष सिद्ध होता है, तो वह नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।

नशा मुक्त पंचायतों का लक्ष्य:

हिमाचल पुलिस और राज्य चुनाव आयोग के समन्वय से अब उम्मीदवारों के रिकॉर्ड की गहन जांच की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि पंचायतों में नेतृत्व ऐसे लोगों के हाथों में होना चाहिए जिनका दामन साफ हो। नशा तस्करी के आरोपियों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखने का उद्देश्य युवा पीढ़ी को गलत संदेश जाने से रोकना है। इस फैसले का प्रदेश भर में स्वागत किया जा रहा है, क्योंकि इससे ईमानदार और स्वच्छ छवि वाले लोगों को आगे आने का अवसर मिलेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण विकास के लिए अनुशासन और नैतिकता का होना अनिवार्य है।

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