स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने जिनेवा में 'स्टॉप टीबी पार्टनरशिप' के एक कार्यक्रम को संबोधित किया
आरएस अनेजा, 21 मई नई दिल्ली - केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री, जगत प्रकाश नड्डा ने जिनेवा में विश्व स्वास्थ्य सभा के 79वें सत्र के दौरान "फेफड़ों के स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग पर मंत्री स्तरीय दृष्टिकोण" विषय पर एक उच्च-स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित किया।
कार्यक्रम का शीर्षक था, "क्या आपकी स्वास्थ्य प्रणाली फेफड़ों के स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग में चुनौतियों का सामना कर रही है?" इसका आयोजन 'स्टॉप टीबी पार्टनरशिप' द्वारा किया गया था और इसकी सह-मेजबानी भारत, जापान, फिलीपींस और ज़ाम्बिया ने की।
इस विशिष्ट सभा को संबोधित करते हुए नड्डा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि समय पर स्क्रीनिंग, शीघ्र निदान और देखभाल तक समान पहुंच ही एक मज़बूत और जन-केंद्रित स्वास्थ्य प्रणाली का मूल आधार है। उन्होंने कहा कि फेफड़ों के स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग को मज़बूत बनाना केवल तकनीक या निदान के उपकरणों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य जीवन बचाना, कष्ट कम करना, स्वास्थ्य पर होने वाले भारी खर्च को रोकना, आजीविका की रक्षा करना और स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों को सुदृढ़ बनाना है।
तपेदिक (टीबी) को खत्म करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि "राष्ट्रीय तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम और 'टीबी-मुक्त भारत' के विज़न के तहत, भारत ने दुनिया के सबसे बड़े स्क्रीनिंग और शीघ्र पहचान प्रयासों में से एक को शुरू किया है।"
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि देश ने "घर-घर जाकर संपर्क करने, मोबाइल स्क्रीनिंग टीमों, सामुदायिक अभियानों और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों तथा संवेदनशील आबादी के बीच विशेष अभियान चलाकर, संवेदनशील आबादी में सक्रिय मामलों की पहचान के प्रयासों का विस्तार किया है।"
नड्डा ने आगे बताया कि भारत ने टीबी और फेफड़ों से संबंधित अन्य बीमारियों का पता लगाने के लिए आधुनिक निदान प्रणालियों का बड़े पैमाने पर विस्तार किया है। निदान में होने वाली देरी को कम करने के लिए, विशेष रूप से दूरदराज और कम सुविधाओं वाले क्षेत्रों में, मॉलिक्यूलर टेस्टिंग प्लेटफॉर्म, डिजिटल चेस्ट एक्स-रे सेवाएं, AI-आधारित व्याख्या उपकरण, हाथ में पकड़कर इस्तेमाल किए जाने वाले स्क्रीनिंग उपकरण और विकेंद्रीकृत परीक्षण प्रणालियों का व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि "नवाचार का उद्देश्य समानता सुनिश्चित करना होना चाहिए और तकनीक को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।"
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने 'आयुष्मान भारत स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों' के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सुधारों की भूमिका और स्वास्थ्य सेवाओं को समुदायों के और करीब लाने में अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों की विशाल टीम के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने इस बात को दोहराया कि केवल निदान ही पर्याप्त नहीं है, और पोषण संबंधी सहायता, उपचार के नियमों का पालन सुनिश्चित करने में मदद, सामाजिक सुरक्षा और सामुदायिक एकजुटता की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने आगे कहा, "टीबी मुक्त भारत अभियान के माध्यम से, भारत ने टीबी के मरीज़ों और उनके परिवारों की सहायता के लिए नागरिकों, संस्थानों, कॉरपोरेट्स और समुदायों को एकजुट किया है।"
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