लखनऊ: रिश्वतखोरी मामले में रेलवे के पूर्व इंजीनियर को 4 साल की सख्त सजा; CBI अदालत ने ठोका जुर्माना
लखनऊ, 05 अगस्त (अन्नू): केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत, लखनऊ ने रिश्वतखोरी के एक मामले में सख्त फैसला सुनाते हुए उत्तर मध्य रेलवे (NCR) बांदा के तत्कालीन सहायक मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर (ADSTE) गिरिजेश कुमार गौर को 4 साल की सश्रम कारावास और ₹20,000 जुर्माने की सजा सुनाई है।
बिल पास करने के बदले मांगी थी ₹20,000 की रिश्वत
सीबीआई द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति (दिनांक 04.08.2026) के अनुसार:
मामले की पृष्ठभूमि: शिकायतकर्ता ने उत्तर मध्य रेलवे (बांदा) के एडीएसटीई कार्यालय के तहत अनुबंध पर अपना वाहन लगाया हुआ था। उसके ₹80,000 मूल्य के बकाया बिलों को पास और स्वीकृत करने के एवज में तत्कालीन ADSTE गिरिजेश कुमार गौर ने ₹20,000 की रिश्वत मांगी थी।
रिश्वत का तरीका: आरोपी इंजीनियर ने बिल मंजूर करने से पहले ₹10,000 और बिल पास होने के बाद ₹10,000 देने की शर्त रखी थी।
सीबीआई ने जाल बिछाकर रंगे हाथों दबोचा था
ट्रैप की कार्रवाई: शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने मामला दर्ज कर 27 मई 2016 को जाल (Trap) बिछाया। आरोपी गिरिजेश कुमार गौर को उसके आवास पर रिश्वत की पहली किस्त की मांग करते हुए और ₹9,700 की अवैध राशि स्वीकार करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया।
चार्जशीट व फैसला: सीबीआई ने जांच पूरी कर 24 जून 2016 को आरोपी के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र (Chargesheet) दाखिल किया था। मामले में चले लंबे ट्रायल के बाद अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराते हुए यह सजा सुनाई।
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