दिल्ली में ₹10 लाख के नकली ऑटो पार्ट्स बरामद; TVS और ASK के नाम पर खपा रहे थे फर्जी माल, 3 शातिर गिरफ्तार
नई दिल्ली, 10 अप्रैल (अन्नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उपभोक्ताओं की सुरक्षा और ब्रांड्स की साख से खिलवाड़ करने वाले एक बड़े गिरोह को बेनकाब किया है। इंस्पेक्टर अजय गहलावत के नेतृत्व और एसीपी अशोक शर्मा के मार्गदर्शन में टीम ने TVS और ASK जैसे नामी ब्रांड्स के नकली स्पेयर पार्ट्स बनाने और बेचने वाले रैकेट को ध्वस्त कर दिया। इस छापेमारी में पुलिस ने करीब ₹10 लाख मूल्य के नकली पुर्जे और पैकेजिंग सामग्री बरामद की है।
इंदरलोक से मंगोलपुरी तक छापेमारी
पुलिस को सूचना मिली थी कि दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में नामी कंपनियों के ट्रेडमार्क का इस्तेमाल कर नकली टू-व्हीलर स्पेयर पार्ट्स तैयार किए जा रहे हैं। पुख्ता जानकारी के आधार पर 8 अप्रैल 2026 को क्राइम ब्रांच की टीम ने कंपनियों के कानूनी प्रतिनिधियों के साथ मिलकर इंदरलोक, झंडेवालान और मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया में ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस दौरान एक पूरी प्रिंटिंग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का भी पता चला जहाँ नकली स्टिकर और बॉक्स छापे जा रहे थे।
गिरफ्तार आरोपियों का प्रोफाइल
पुलिस ने इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है:
रियाजुद्दीन (51 वर्ष): निवासी इंदरलोक, दिल्ली। यह पहले भी कॉपीराइट एक्ट के तहत जेल जा चुका है।
अनिल कुमार (60 वर्ष): निवासी कृष्णा नगर, दिल्ली। यह भी पहले इसी तरह के अपराधों में संलिप्त रहा है।
अर्जुन कुमार (49 वर्ष): निवासी त्रिनगर, दिल्ली। यह अपनी यूनिट में नकली स्टिकर और लेबल छापने का काम करता था।
भारी मात्रा में बरामदगी
छापेमारी के दौरान पुलिस को मिले सामान की सूची चौंकाने वाली है:
ASK ब्रांड के करीब 1040 जोड़ी नकली ब्रेक शू।
TVS लोगो वाली लगभग 67,370 प्लास्टिक पैकिंग सामग्री।
करीब 14,000 नकली MRP स्टिकर और 400 कार्डबोर्ड बॉक्स।
10 प्रिंटेड रोल और खाली पैकेजिंग बंडल।
नकली सामग्री छापने वाली पूरी मशीनरी (प्रिंटिंग यूनिट)।
उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए खतरा
क्राइम ब्रांच के डीसीपी पंकज कुमार (IPS) ने बताया कि नकली ब्रेक शू जैसे पुर्जे सड़क पर चलने वाले वाहनों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह माल किन-किन बाजारों में सप्लाई किया जा रहा था। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि ट्रेडमार्क उल्लंघन और जालसाजी करने वालों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति जारी रहेगी।
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