नेत्रदान पखवाड़ा अम्बाला : "नेत्रदान जिंदगी को रोशनी" थीम पर जागरूकता कार्यक्रम

जे कुमार, अम्बाला 4 सितम्बर - स्वास्थ्य विभाग की ओर से चल रहे 40वें नेत्रदान पखवाड़े के 11वें दिन "नेत्रदान जिंदगी को रोशनी" थीम पर जागरूकता अभियान आयोजित किया गया।

इस अवसर पर लोगों को संदेश दिया गया कि मृत्यु के बाद भी उनकी आंखें किसी दूसरे जरूरतमंद को रोशनी दे सकती हैं। कार्यक्रम में नेत्र रोग विशेषज्ञों ने मरीजों को आंखों की प्राथमिक देखभाल के साथ-साथ काला मोतिया जैसी गंभीर बीमारी के बारे में भी जानकारी दी।

विशेषज्ञों ने बताया कि काला मोतिया (ग्लूकोमा) दृष्टिहीनता का एक प्रमुख कारण बनता जा रहा है। इसे "साइलेंट थीफ ऑफ विजन" यानी दृष्टि का मौन चोर भी कहा जाता है क्योंकि यह धीरे-धीरे आंखों की नसों को प्रभावित कर व्यक्ति को अंधकार की स्थिति तक पहुंचा देता है।

कई बार इसके लक्षण सामान्य दिखाई देते हैं जैसे आंखों में तेज दर्द, सिर दर्द, बार-बार चश्मे का नंबर बदलना या जलते बल्ब के चारों ओर इंद्रधनुषी घेरे दिखना। ऐसे में तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेना बेहद जरूरी है।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधियों ने लोगों से अपील की कि वे नेत्रदान के संकल्प के साथ-साथ आंखों की नियमित जांच करवाते रहें और समाज में नेत्रदान को जन-आंदोलन बनाने में सहयोग दें।

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