कोलकाता मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED का बड़ा एक्शन: पूर्व DCP शांतनु सिन्हा बिस्वास और सोना पप्पू गिरफ्तार, ₹1.47 करोड़ कैश व सोना ज़ब्त
कोलकाता, 3 जून (अन्नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) के कोलकाता जोनल ऑफिस ने पश्चिम बंगाल में सक्रिय एक बेहद रसूखदार और खूंखार आपराधिक सिंडिकेट के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ED द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, इस मामले में कोलकाता पुलिस के पूर्व डिप्टी कमिश्नर (DCP) शांतनु सिन्हा बिस्वास को 14 मई 2026 और मुख्य सरगना बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू को 19 मई 2026 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 19(1) के तहत गिरफ्तार किया गया है।
दोनों आरोपियों को कोलकाता के बिचार भवन स्थित माननीय विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया था, जहाँ से उन्हें क्रमशः 14 दिन और 10 दिन की ईडी कस्टडी में भेजा गया था। कस्टडी की अवधि पूरी होने के बाद अब दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत (जेल) भेज दिया गया है। इस मामले में ईडी पहले ही एक अन्य मुख्य आरोपी जय एस. कामदार को भी गिरफ्तार कर चुकी है।
पश्चिम बंगाल में चल रहा था अवैध सिंडिकेट; हथियारों की सप्लाई का भी आरोप
ईडी की प्रेस रिलीज के मुताबिक, पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस द्वारा आरोपियों के खिलाफ आईपीसी (IPC) और आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज की गई कई प्राथमिकियों (FIRs) के आधार पर इस मनी लॉन्ड्रिंग जांच की शुरुआत की गई थी। जांच में सामने आया कि सोना पप्पू और उसके साथी बंगाल में एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट चला रहे थे, जिसके जरिए अवैध रूप से भारी-भरकम फंड जुटाया गया था। सोना पप्पू कोलकाता के गोलपार्क के पास कंकुलिया रोड पर हुई हिंसा के एक मामले में भी वांछित था और लगातार फरार चल रहा था।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार आरोपी जय एस. कामदार और सोना पप्पू के बीच कई संदिग्ध वित्तीय लेनदेन हुए थे। कामदार ने सोना पप्पू की पत्नी सोमा सोनार पोद्दार को अवैध हथियार (फायरआर्म्स) भी सप्लाई किए थे, हालांकि पूछताछ में उसने इस संबंध में कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया।
छापेमारी में मिली अकूत संपत्ति: ₹1.47 करोड़ कैश, फॉर्च्यूनर और बिना लाइसेंस की रिवॉल्वर बरामद
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए 1 अप्रैल, 19 अप्रैल और 26 अप्रैल 2026 को कोलकाता और उसके आसपास के कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। सोना पप्पू, पूर्व डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास और जय एस. कामदार के ठिकानों से ईडी ने भारी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं।
जब्त किए गए माल का विवरण:
नगदी: लगभग ₹1.47 करोड़ रुपये कैश।
ज्वेलरी: भारी मात्रा में सोने के आभूषण और चांदी।
वाहन: एक टोयोटा फॉर्च्यूनर (Fortuner) गाड़ी।
अवैध हथियार: एक बिना लाइसेंस वाली बंदूक (रिवॉल्वर)।
अचल संपत्तियां: आपराधिक गतिविधियों के जरिए जुटाई गई कई एकड़ जमीन और आलीशान इमारतें भी चिन्हित की गई हैं।
पुलिस अफसरों को "महंगे गिफ्ट्स" देकर चल रहा था जमीन कब्जाने का खेल
ED की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पीएमएलए जांच में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आरोपी जय एस. कामदार कोलकाता पुलिस के कई बड़े अधिकारियों के साथ सीधे संपर्क में था। वह पुलिस अफसरों और उनके परिवार के सदस्यों को महंगे "गिफ्ट्स" और नाजायज फायदे पहुंचाता था। इसके बदले में वह पुलिस महकमे में अपने रसूख और प्रभाव का इस्तेमाल कर आम और सीधे-साधे लोगों की कीमती जमीनों को अवैध रूप से हड़पने (Land Grabbing) का धंधा चला रहा था।
पूर्व DCP शांतनु सिन्हा की काली कमाई और संलिप्तता
जांच में सामने आया कि गिरफ्तार पूर्व पुलिस अधिकारी शांतनु सिन्हा बिस्वास, जो कोलकाता पुलिस में डिप्टी कमिश्नर (SB) के पद पर तैनात थे, उन्होंने खुद और अपने परिवार के लिए भारी मौद्रिक लाभ (घूस) लेकर जय एस. कामदार की अवैध गतिविधियों को संरक्षण दिया था।
इसके अलावा, शांतनु सिन्हा पश्चिम बंगाल और कोलकाता पुलिस कल्याण समितियों (West Bengal & Kolkata Police Welfare Committees - जो अब भंग की जा चुकी हैं) के मुख्य समन्वयक और नोडल अधिकारी भी थे। इस महत्वपूर्ण पद पर रहने के कारण उनका बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर सीधा प्रभाव था, जिसका उन्होंने गलत फायदा उठाया।
जबरन वसूली और अवैध निर्माण से पैदा की 'Proceeds of Crime'
ईडी की अब तक की जांच में यह साफ हो गया है कि इस पूरे सिंडिकेट ने रंगदारी (Extortion), जबरन जमीन कब्जाने और सोना पप्पू व जय कामदार के नियंत्रण वाली संस्थाओं के माध्यम से अवैध व अनधिकृत बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन करके करोड़ों रुपये की काली कमाई (Proceeds of Crime) अर्जित की थी। प्रवर्तन निदेशालय ने साफ किया है कि इस मामले में नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों को बेनकाब करने के लिए आगे की जांच (Further Investigation) अभी जारी है।
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