ED ने गुवाहाटी कोर्ट में दाखिल की चार्जशीट: असम ग्रामीण विकास बैंक के पूर्व ब्रांच हेड पर 7.28 करोड़ के गबन का आरोप
नई दिल्ली/असम, 20 मई (अन्नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, ईडी के गुवाहाटी जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गुवाहाटी स्थित विशेष अदालत में एक शिकायत (चार्जशीट) दाखिल की है। यह शिकायत असम ग्रामीण विकास बैंक (AGVB), लाहोरीजन शाखा (कार्बी आंगलोंग) के तत्कालीन शाखा प्रबंधक दिब्यज्योति कलिता और उनके सहयोगी बीरबाहु ब्रह्मा (निवासी गोलपारा) के खिलाफ दर्ज की गई है। दोनों पर बैंक फंड की हेराफेरी कर मनी लॉन्ड्रिंग करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
पुलिस और सीबीआई की जांच के बाद ईडी ने संभाला था मोर्चा
प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, इस पूरे मामले की शुरुआत सबसे पहले कार्बी आंगलोंग के खटखटी पुलिस स्टेशन में दर्ज धोखाधड़ी की एफआईआर से हुई थी। बाद में इस केस को सीबीआई (CBI), एसीबी, शिलांग द्वारा दोबारा दर्ज किया गया, जिसने अप्रैल 2024 में अदालत में अपनी चार्जशीट पेश की थी। इसके बाद ईडी ने भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के कोण से अपनी जांच शुरू की थी।
फिनाकल सॉफ्टवेयर का दुरुपयोग कर किया 7.28 करोड़ का घोटाला
प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, ईडी की जांच में यह खुलासा हुआ है कि दिसंबर 2020 से अप्रैल 2021 के बीच तत्कालीन ब्रांच हेड दिब्यज्योति कलिता ने बीरबाहु ब्रह्मा के साथ मिलकर एक गहरी साजिश रची थी। कलिता ने बैंक के 'फिनाकल' बैंकिंग सॉफ्टवेयर के क्रेडेंशियल्स का दुरुपयोग करते हुए बिना किसी वाउचर या ग्राहकों के निर्देश के 20 अवैध ट्रांजैक्शन किए। इन फर्जी ट्रांजैक्शन के जरिए बैंक के एडजस्टमेंट क्लियरिंग अकाउंट से कुल 7.28 करोड़ रुपये का गबन किया गया।
फर्जी खातों और कंपनियों के जरिए ठिकाने लगाई गई रकम
प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी http://प्रेस रिलीज के अनुसार, इस घोटाले की रकम को वैध दिखाने के लिए आरोपियों ने जालसाजी का सहारा लिया। उन्होंने पैसे को ठिकाने लगाने के लिए फर्जी नाम से खोले गए खातों, एक ही दिन में बनाए गए कई सेल्फ-हेल्प ग्रुप (SHG) व सोसाइटी के खातों और टर्म डिपॉजिट (FDR) की एक पूरी सीरीज तैयार की। बाद में इस काली कमाई को मुख्य आरोपी कलिता के निजी खाते, उसकी पत्नी के खाते, उसकी चाय व्यवसाय की पार्टनरशिप फर्म और दूसरे आरोपी के परिजनों व करीबियों के फर्जी खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।
छापेमारी में मिले थे अहम सबूत और दस्तावेज
प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, इस मामले में ईडी ने नवंबर 2024 में दोनों आरोपियों के आवासों पर व्यापक छापेमारी की थी। इस तलाशी अभियान के दौरान जांच एजेंसी को कई आपत्तिजनक दस्तावेज, संयुक्त निवेश दर्ज की गई हाथ से लिखी नोटबुक, कई संपत्तियों के कागजात, तीसरे पक्षों के नाम की चेकबुक और मुख्य आरोपी का रुपे (RuPay) डेबिट कार्ड बरामद हुआ था। ईडी इस पूरे घोटाले के वित्तीय नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए आगे की जांच कर रही है।
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