छत्तीसगढ़ DMF घोटाला: ED ने मुख्य बिचौलिए सतपाल सिंह छाबड़ा को किया गिरफ्तार; कोर्ट ने भेजी 5 दिन की कस्टडी रिमांड
छत्तीसगढ़, 3 सितंबर (अन्नू): प्रवर्तन निदेशालय के रायपुर जोनल ऑफिस ने छत्तीसगढ़ में हुए बहुचर्चित जिला खनिज संस्थान न्यास (District Mineral Foundation - DMF) फंड घोटाला मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी सतपाल सिंह छाबड़ा (पुत्र धरमपाल सिंह छाबड़ा) को 1 सितंबर 2026 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को रायपुर स्थित विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहाँ से कोर्ट ने उसे 5 दिनों की ED कस्टडी रिमांड पर भेज दिया है।
ED द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार:
ACB/EOW और छत्तीसगढ़ पुलिस की FIR के आधार पर जांच: ईडी ने इस मामले की जांच रायपुर ACB/EOW और छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा DMF फंड के गबन को लेकर दर्ज की गई विभिन्न प्राथमिकियों (FIRs) के आधार पर शुरू की थी।
₹9,188.20 करोड़ के फंड में हेराफेरी: वित्त वर्ष 2019-20 से 2023-24 के दौरान छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों को DMFT के तहत लगभग ₹9,188.20 करोड़ प्राप्त हुए थे। जांच में सामने आया कि अधिकारियों, बिचौलियों और विक्रेताओं के एक सुव्यवस्थित सिंडिकेट द्वारा इस राशि का बड़ा हिस्सा तय उद्देश्यों से हटाकर सप्लाई-ओरिएंटेड कार्यों में डाइवर्ट कर दिया गया, ताकि फर्जी/अत्यधिक मूल्य (Inflated Pricing) और भारी कमीशन वसूला जा सके।
बीज निगम के जरिए 25% से 50% तक कमीशनखोरी: फंड का एक बड़ा हिस्सा 'छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम' (बीज निगम) के माध्यम से भेजा गया। यहाँ बिचौलियों ने रेट कॉन्ट्रैक्ट होल्डर कंपनियों के वर्क ऑर्डर पर 25% से 50% तक का कमीशन वसूला। इस कमीशन राशि को वर्क ऑर्डर जारी करने और भुगतान रिलीज करवाने के एवज में लोक सेवकों (Public Servants) और प्रभावशाली व्यक्तियों तक पहुँचाया जाता था।
सतपाल सिंह छाबड़ा की मुख्य भूमिका: सतपाल सिंह सिंडिकेट के मुख्य बिचौलियों (Liaisoners) और वित्तीय समन्वयकों में से एक के रूप में काम कर रहा था। वह ज्यादा कमीशन देने वाले सप्लाई कार्यों की पहचान करता, चुनिंदा विक्रेताओं में प्रतिशत के आधार पर काम बांटता, वर्क ऑर्डर और पेमेंट जारी करवाता और वेंडरों से कमीशन एकत्र कर सिंडिकेट के सदस्यों में बांटता था।
बैंक खातों में मिले ₹31 करोड़ के 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम'
ईडी द्वारा बैंकिंग लेन-देन के विश्लेषण और दर्ज बयानों की जांच से खुलासा हुआ है कि आरोपी ने लगभग ₹31 करोड़ की अवैध कमीशन राशि प्राप्त की, जो कि अपराध की आय ('Proceeds of Crime') है। यह पूरी रकम आरोपी, उसके परिवार के सदस्यों, HUF और उसके नियंत्रण वाली संस्थाओं/कंपनियों के बैंक खातों में प्राप्त की गई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सतपाल सिंह छाबड़ा को धारा 19 PMLA के तहत गिरफ्तार किया गया है और फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है।
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