भारत-नेपाल टेक साझेदारी: भाषिनी और काठमांडू यूनिवर्सिटी का लैंग्वेज AI से नेपाल की भाषाओं को सशक्त बनाने का नया कदम

आरएस अनेजा, 2 सितंबर नई दिल्ली - भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (DIC) के डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन (DIBD) ने काठमांडू यूनिवर्सिटी की 'सेंटर फॉर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (DPI-AI) टीम के साथ एक इंटरैक्टिव सेशन किया और उसके बाद वाइस चांसलर के साथ बैठक की। इस बातचीत का मकसद लैंग्वेज AI में मिलकर काम करने के मौकों को तलाशना था, ताकि नेपाल के लिए भाषा तकनीकों को बेहतर बनाया जा सके।

बातचीत में मौजूदा भाषा मॉडलों को मजबूत करने और उन भाषाओं के लिए नए मॉडल बनाने के मौकों पर जोर दिया गया, जिनका AI में प्रतिनिधित्व कम है। नेपाल की भाषाई विविधता को डिजिटल और AI इकोसिस्टम में शामिल करने के महत्व को समझते हुए नेपाली, नेवारी, तमांग और गुरुंग भाषाओं के साथ-साथ प्रचलित लिपि और रंजना लिपि जैसी पारंपरिक लिपियों पर खास ध्यान दिया गया।

बातचीत का एक अहम हिस्सा भाषा डेटा की चुनौती पर केंद्रित था। अच्छी क्वालिटी वाले और सही प्रतिनिधित्व वाले डेटासेट बनाने के लिए अलग-अलग भाषाओं, बोलने वालों और लिपियों के डेटा को लगातार इकट्ठा और व्यवस्थित करने की जरूरत होती है। चर्चा में अनुवाद क्षमताओं को बेहतर बनाने और भाषा मॉडलों को ट्रेन करने, बेहतर बनाने और बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए जरूरी कंप्यूटिंग जरूरतों को पूरा करने पर भी बात हुई।

इस बातचीत में केवल मॉडल बनाने से आगे बढ़कर उन्हें असल दुनिया में लागू करने पर भी विचार किया गया, जिसमें 'वॉयस-फर्स्ट' समाधानों की संभावना भी शामिल थी। मुख्य फोकस भाषा डेटा, मॉडलों और तकनीक को ऐसे एप्लीकेशन से जोड़ने पर था जो स्थानीय भाषाओं में सार्थक डिजिटल अनुभव बना सकें।

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