दिल्ली: ऐतिहासिक विरासत को सहेजने के लिए 'शोध छात्रवृत्ति' को दी मंजूरी, हर महीने मिलेंगे 50 हजार रुपये तक

नई दिल्ली, 13 जुलाई (अन्‍नू): दिल्ली सरकार ने राजधानी की हजारों साल पुरानी ऐतिहासिक विरासत के वैज्ञानिक अध्ययन, दस्तावेजीकरण (Documentation) और डिजिटलीकरण के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने पुरालेख और पुरातत्व (Archives and Archaeology) के क्षेत्र में शोध छात्रवृत्ति (Research Fellowship) को मंजूरी दे दी है। इसके तहत प्राचीन सभ्यताओं से जुड़े दस्तावेजों, सरकारी रिकॉर्डों, पुरातात्विक स्थलों और प्राचीन इमारतों को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित किया जाएगा।

आने वाली पीढ़ियों के लिए विरासत को सहेजना प्राथमिकता: सीएम रेखा गुप्ता

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस योजना को लेकर कहा कि दिल्ली सिर्फ देश की राजधानी ही नहीं है, बल्कि यह इतिहास, संस्कृति और सभ्यता की एक जीवंत धरोहर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान और व्यवस्थित दस्तावेजीकरण के जरिए इस समृद्ध विरासत को संभालना और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे अधिक सुलभ बनाना सरकार की मुख्य प्राथमिकताओं में शामिल है।

विशेषज्ञों का समूह तैयार करने के लिए दो तरह की फेलोशिप

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, दिल्ली मंत्रिमंडल ने इतिहास, पुरातत्व और विरासत संरक्षण के क्षेत्र में विशेष अध्ययन को बढ़ावा देने तथा विशेषज्ञों का एक मजबूत कैडर तैयार करने के उद्देश्य से दो विशिष्ट छात्रवृत्तियों को हरी झंडी दिखाई है:

  1. पुरालेख शोध छात्रवृत्ति (Archives Research Fellowship)

  2. पुरातत्व शोध छात्रवृत्ति (Archaeology Research Fellowship)

इन आधुनिक और पारंपरिक क्षेत्रों पर होगा काम

इस योजना के दायरे में कई महत्वपूर्ण और तकनीकी क्षेत्रों को शामिल किया गया है, जिनमें:

  • रिकॉर्ड का वैज्ञानिक रखरखाव और पुरालेखीय सामग्रियों का संरक्षण।

  • सूचनाओं का प्रसार और डेटा प्रबंधन।

  • माइक्रोफिल्मिंग (दस्तावेजों को सूक्ष्म फिल्म में सुरक्षित करना) और रीप्रोग्राफी (दस्तावेजों की हूबहू नकल तैयार करना)।

  • शोध प्रकाशन और प्राच्य (पुरानी) भाषाओं, विशेष रूप से उर्दू और फारसी से जुड़े अध्ययन।

हर साल 15 शोधार्थियों का होगा चयन, मिलेगी आकर्षक राशि

इस फेलोशिप योजना के तहत सरकार हर साल 15 शोधार्थियों (फेलो) का चयन करेगी। चुने गए इन फेलो का कार्यकाल एक वर्ष का होगा। शोध कार्य के दौरान इन शोधार्थियों को 25,000 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक की मासिक छात्रवृत्ति (Stipend) दी जाएगी, ताकि वे बिना किसी आर्थिक बाधा के दिल्ली के गौरवशाली इतिहास को सहेजने में अपना योगदान दे सकें।

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