14/07/26

शिमला में SJVNL के खिलाफ ठेका मजदूरों का हल्लाबोल; झाकड़ी जलविद्युत परियोजना के बाहर जोरदार प्रदर्शन

अभिकान्त, 14  जुलाई हिमाचल : शिमला के रामपुर स्थित झाकड़ी में 1500 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना में कार्यरत ठेका मजदूरों ने मंगलवार को नवरत्न कंपनी एसजेवीएनएल (SJVNL) प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 'एसजेवीएनएल कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन (सीटू)' के बैनर तले एकजुट हुए सैकड़ों ठेका मजदूरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर कंपनी प्रबंधन के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते हुए प्रशासनिक परिसर के बाहर जमकर नारेबाजी और जोरदार प्रदर्शन किया।

धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू (CITU) के राज्य सचिव कुलदीप सिंह ने प्रबंधन पर मजदूरों का शोषण करने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस बेहद महत्वपूर्ण परियोजना में दिन-रात कड़ी मेहनत करने वाले ठेका मजदूर लंबे समय से अपने बुनियादी अधिकारों, सुविधाओं और कानूनी लाभों से पूरी तरह वंचित हैं। इस प्रदर्शन में यूनियन के कई स्थानीय नेताओं समेत भारी संख्या में परियोजना के ठेका मजदूर शामिल हुए और सभी ने मांगें पूरी होने तक अपनी आवाज बुलंद रखने का संकल्प लिया।

यूनियन की प्रमुख मांगें:

  • ग्रेच्युटी का लाभ: सभी पात्र ठेका कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी कानून का लाभ सुनिश्चित किया जाए और इसका तुरंत भुगतान किया जाए।

  • नियमित इंक्रीमेंट: सभी श्रेणी के मजदूरों को नियमित रूप से मासिक इंक्रीमेंट (वार्षिक वेतन वृद्धि) का लाभ दिया जाए।

  • स्पष्ट पदोन्नति नीति: कर्मचारियों के करियर विकास के लिए एक पारदर्शी और स्पष्ट पदोन्नति (प्रमोशन) नीति लागू की जाए।

यूनियन नेताओं का आरोप है कि परियोजना में लंबे समय से कई महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण कार्यरत कर्मचारियों पर काम का अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने मांग की कि खाली पदों को तुरंत भरा जाए और कर्मचारियों को उनके काम व अनुभव के आधार पर उचित पदनाम (डेजिग्नेशन) दिए जाएं। इसके साथ ही, इस महंगाई के दौर में मजदूरों ने वर्दी भत्ता, यात्रा भत्ता और धुलाई भत्ते में भी सम्मानजनक बढ़ोतरी करने की पुरजोर मांग उठाई है।

सीटू के राज्य सचिव कुलदीप सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि परियोजना के भीतर श्रम कानूनों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। यदि एसजेवीएनएल (SJVNL) प्रबंधन ने मजदूरों के इन कानूनी अधिकारों और मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आंदोलन के कारण परियोजना के काम में कोई भी बाधा आती है, तो इसकी समस्त जिम्मेदारी कंपनी प्रबंधन की होगी।

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