14/03/26

चंडीगढ़ सोना चोरी मामला: सेशन कोर्ट ने आरोपी की जमानत की रद्द, 15 दिनों के भीतर सरेंडर करने का कड़ा आदेश

चंडीगढ़, 14 मार्च (अन्‍नू): चंडीगढ़ के मनीमाजरा स्थित एक ज्वेलरी शॉप से 505 ग्राम सोना चोरी करने के मामले में आरोपी पलाश साहू की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सेशन कोर्ट ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी को मिली जमानत को तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया है। एडिशनल सेशन जज डॉ. हरप्रीत कौर की अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आरोपी को अगले 15 दिनों के भीतर ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण (सरेंडर) करना होगा। यदि आरोपी तय समय सीमा के अंदर पेश नहीं होता है, तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।


यह पूरा मामला साल 2024 का है, जब शिकायतकर्ता सौरव भुनिया ने पलाश साहू पर अपनी दुकान से भारी मात्रा में सोना चोरी करने का आरोप लगाते हुए मनीमाजरा थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तफ्तीश शुरू की और जून 2024 में पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर जिले में छापेमारी कर आरोपी को धर दबोचा। हालांकि, गिरफ्तारी के बाद आरोपी को चंडीगढ़ लाने के दौरान फ्लाइट छूट जाने की वजह से उसे स्थानीय बरासात कोर्ट और फिर घाटल कोर्ट में पेश करना पड़ा, जहाँ से उसे कुछ तकनीकी शर्तों के आधार पर अंतरिम डिफॉल्ट बेल मिल गई थी।


जुलाई 2024 में जब आरोपी चंडीगढ़ की अदालत में पेश हुआ, तो उसे मिली डिफॉल्ट बेल को बरकरार रखा गया था। इसके बाद पुलिस ने इस जमानत को चुनौती देते हुए इसे रद्द करने की अर्जी लगाई थी, जिसे शुरुआत में 4 सितंबर को खारिज कर दिया गया था। अब सत्र न्यायालय ने शिकायतकर्ता की अपील पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत के उस पुराने फैसले को पलट दिया है। अदालत ने माना कि आरोपी की जमानत रद्द करने के पर्याप्त आधार मौजूद हैं और पिछली प्रक्रिया में कानूनी बारीकियों को सही तरीके से नहीं परखा गया था।


अपने फैसले में सेशन कोर्ट ने 24 घंटे के भीतर पेशी के नियम पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी को गिरफ्तारी के निर्धारित समय के भीतर ही मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था, इसलिए केवल समय की गणना के आधार पर उसे डिफॉल्ट बेल का लाभ नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि डिफॉल्ट बेल का अधिकार केवल तब मिलता है जब जांच एजेंसी तय 60 या 90 दिनों में अपनी रिपोर्ट पेश करने में विफल रहे। इस आदेश के बाद अब आरोपी को अनिवार्य रूप से सरेंडर करना होगा, अन्यथा उसे दोबारा जेल की सलाखों के पीछे भेजने के लिए पुलिस सख्त कदम उठाएगी।


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