कंबोडिया साइबर गुलामी और मानव तस्करी मामला: एनआईए ने फरार मास्टरमाइंड मुन्ना सिंह समेत 5 आरोपियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट
नई दिल्ली, 16 मई (अन्नू): राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी ने कंबोडिया से जुड़े मानव तस्करी और साइबर गुलामी (Cyber Slavery) के एक बड़े मामले में शुक्रवार को पांच आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में फरार मुख्य मास्टरमाइंड आनंद कुमार सिंह उर्फ मुन्ना सिंह का नाम भी शामिल है। एनआईए ने यह आरोप पत्र बिहार की राजधानी पटना स्थित एनआईए की विशेष अदालत में भारतीय दंड संहिता (IPC) की संबंधित गंभीर धाराओं के तहत दाखिल किया है।
कंबोडिया से लौटते ही धरे गए थे सह-आरोपी
एनआईए द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, इस चार्जशीट में नामजद किए गए तीन सह-आरोपियों—अभय नाथ दुबे (निवासी उत्तर प्रदेश), अभिरंजन कुमार (निवासी बिहार) और रोहित यादव (निवासी उत्तर प्रदेश)—को इसी साल फरवरी महीने में कंबोडिया से देश की राजधानी दिल्ली लौटते ही गिरफ्तार कर लिया गया था। वहीं, इस मामले का पांचवां आरोपी, जिसकी पहचान प्रह्लाद कुमार सिंह के रूप में हुई है, फिलहाल अदालत से जमानत पर बाहर है। एजेंसी अब फरार मुख्य सरगना की तलाश में जुटी हुई है।
नौकरी का झांसा देकर युवाओं को कंबोडिया में बनाया बंधक
जांच में इस बात का सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि यह गिरोह एक संगठित मानव तस्करी सिंडिकेट चला रहा था। ये लोग भारतीय युवाओं को कंबोडिया में वैध नौकरी और भारी-भरकम सैलरी (वेतन) का लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे। कंबोडिया पहुंचने पर आरोपियों द्वारा पीड़ितों के पासपोर्ट अवैध रूप से जब्त कर लिए जाते थे। इसके बाद युवाओं को वहां की फर्जी साइबर फ्रॉड कंपनियों (Scam Companies) में जबरन काम करने के लिए मजबूर किया जाता था। यदि कोई युवा इस काम का विरोध करता, तो उसे बिजली के झटके दिए जाते थे, खाना-पानी बंद कर दिया जाता था और कमरे में बंद कर शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
हर भारतीय युवा को फर्जी कंपनियों में 2 से 3 हजार डॉलर में बेचता था सरगना
एनआईए द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, जांच में आनंद कुमार सिंह उर्फ मुन्ना सिंह को इस पूरे अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का किंगपिन (मुख्य सरगना) पाया गया है। आनंद भारत में मौजूद अपने सब-एजेंटों और ट्रैवल एजेंटों के जरिए बेरोजगार युवाओं को टारगेट करता था। वह कंबोडिया में बैठे अपने सहयोगियों के साथ मिलकर इन युवाओं को अवैध रूप से सीमा पार कराता था। एनआईए के मुताबिक, वह फर्जी कंपनियों को बेचे जाने वाले हर भारतीय युवा के बदले 2,000 से 3,000 अमेरिकी डॉलर की मोटी रकम वसूलता था। एजेंसी इस केस (RC 10/2024/NIA/DLI) से जुड़े अन्य सदस्यों और पूरी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए जांच जारी रखे हुए है।
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