बेंगलुरु अल-हिंद ISIS आतंकी साजिश मामला: मुख्य आरोपी मोहम्मद हनीफ खान को 7 साल की बामशक्कत जेल, NIA कोर्ट ने सुनाया फैसला

नई दिल्ली/बेंगलुरु, 15 जुलाई (अन्‍नू): राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, बेंगलुरु (कर्नाटक) स्थित विशेष एनआईए अदालत ने 2020 के अल-हिंद ISIS आतंकी साजिश मामले में एक मुख्य आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है. अदालत ने आरोपी मोहम्मद हनीफ खान को 7 साल के कठोर कारावास (बामशक्कत जेल) की सजा सुनाई है और साथ ही 48,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है. इस मामले (RC-04/2020/NIA/DLI) में सजा पाने वाला यह पहला दोषी है. एनआईए अब तक इस पूरे मामले में कुल 20 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, और सभी को गिरफ्तार किया जा चुका है.

ट्रेनिंग कैंप और ठिकाने बनाने के लिए की थी रेकी

एनआईए की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, अक्टूबर 2025 में शुरू हुए ट्रायल के दौरान हनीफ ने अपना गुनाह कबूल कर लिया था. जांच में सामने आया कि हनीफ उस रेकी टीम का हिस्सा था, जिसने कर्नाटक के चामराजनगर जिले के शिवनसमुद्र क्षेत्र और गुंडलुपेट क्षेत्र का दौरा किया था. इस रेकी का मकसद अल-हिंद के सदस्यों के लिए ट्रेनिंग कैंप आयोजित करने और छिपने के ठिकाने बनाने के लिए घने जंगलों की पहचान करना था. इस पूरी साजिश का मुख्य उद्देश्य भारत में ISIS/दायिश विलायत (प्रांत) की स्थापना करना था.

महबूब पाशा था मास्टरमाइंड, रची थी दंगों की साजिश

एनआईए की जांच में खुलासा हुआ है कि इस पूरे आतंकी मॉड्यूल का मास्टरमाइंड मुख्य आरोपी महबूब पाशा था. पाशा ने गुरुग्रामपल्या स्थित अपने आवास पर कई बैठकें की थीं. इन बैठकों में प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS के देश विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाने, सांप्रदायिक दंगे भड़काने और टारगेट किलिंग (लक्षित हत्याओं) को अंजाम देने की खतरनाक साजिश रची गई थी.

हथियार सप्लाई और आरोपियों को भगाने में की मदद

जांच एजेंसी के अनुसार, पाशा ने अपने रिश्तेदारों और सह-आरोपियों के साथ मिलकर क्षेत्र में ISIS की गतिविधियों को बढ़ाने के लिए हथियार और विस्फोटक जुटाने की भी साजिश रची थी. पाशा ने ही हनीफ को हिंसक वारदातों को अंजाम देने के लिए दो पिस्तौल और 60 जिंदा कारतूस मुहैया कराए थे. इसके अलावा, हनीफ ने ही साजिश के तहत कई सह-आरोपियों को बेंगलुरु से पश्चिम बंगाल भगाने के लिए एक किराए की कार चलाई थी.

कर्नाटक पुलिस से NIA ने हाथ में ली थी जांच

यह मामला मूल रूप से 10 जनवरी 2020 को बेंगलुरु सिटी में कर्नाटक राज्य पुलिस द्वारा दर्ज किया गया था, जिसे कुछ दिनों बाद एनआईए ने अपने हाथ में ले लिया था. एनआईए ने बताया कि मामले की लगातार जांच जारी है और एजेंसी अब उस ऑनलाइन हैंडलर का पता लगाने का प्रयास कर रही है, जिसने इस पूरे आतंकी मॉड्यूल को तैयार करने की योजना बनाई और साजिश रची थी.

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