बैंक धोखाधड़ी: CBI कोर्ट ने SBI के पूर्व मैनेजर समेत दो को सुनाई 5-5 साल की कैद, 13 लाख का जुर्माना
लखनऊ, 31 मार्च (अन्नू): उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित विशेष CBI अदालत ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में अपना कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इलाहाबाद (अब प्रयागराज) की कर्नलगंज शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक अशोक कुमार दीक्षित और मेसर्स जी.आर. एसोसिएट्स के मालिक गोविंद राम तिवारी को दोषी करार देते हुए पाँच-पाँच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने दोनों दोषियों पर कुल 13 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया है।
यह मामला साल 2003-2004 के दौरान हुए एक सुनियोजित वित्तीय षड्यंत्र से जुड़ा है। सीबीआई द्वारा 31 मई 2005 को दर्ज की गई प्राथमिकी के अनुसार, तत्कालीन मैनेजर अशोक कुमार दीक्षित ने गोविंद राम तिवारी के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची थी। आरोप था कि दीक्षित ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए गोविंद राम द्वारा उपलब्ध कराए गए फर्जी और जाली दस्तावेजों के आधार पर कुल 36 हाउसिंग लोन (गृह ऋण) स्वीकृत और वितरित किए थे। करीब 1.69 करोड़ रुपये के इन अवैध ऋणों की वजह से बैंक को ब्याज समेत लगभग 1.81 करोड़ रुपये का बड़ा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा था।
सीबीआई ने इस मामले की गहनता से जाँच करने के बाद 8 अगस्त 2007 को आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। मामले की लंबी सुनवाई और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने पाया कि दोनों आरोपियों ने जानबूझकर बैंक के साथ धोखाधड़ी की और खुद को अनुचित लाभ पहुँचाया। 30 मार्च 2026 को सुनाए गए इस फैसले ने स्पष्ट संदेश दिया है कि बैंकिंग प्रणाली और सार्वजनिक धन के साथ खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों और बिचौलियों को बख्शा नहीं जाएगा।
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