13/06/26

बहादुरगढ़ में नगर परिषद की कार्रवाई का भारी विरोध: बुलडोजर के आगे लेटे बुजुर्ग और महिलाएं, हंगामा बढ़ने पर प्रशासन को पीछे हटना पड़ा

झज्जर, 13 जून (अन्‍नू): झज्जर जिले के बहादुरगढ़ में सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने पहुंची नगर परिषद (MC) की टीम को स्थानीय निवासियों के जबर्दस्त और उग्र विरोध का सामना करना पड़ा। नगर परिषद की टीम जब भारी पुलिस बल और बुलडोजर (जेसीबी) के साथ अवैध निर्माणों को ढहाने पहुंची, तो वहां मौजूद महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने अपने आशियानों को बचाने के लिए जान की बाजी लगा दी।

जैसे ही बुलडोजर ने एक के बाद एक मकानों को तोड़ना शुरू किया, वैसे ही पूरी कॉलोनी में चीख-पुकार मच गई और गुस्साए लोग मशीनों के आगे आकर खड़े हो गए। भारी हंगामे, पत्थरबाजी की नौबत और तनावपूर्ण हालातों को देखते हुए प्रशासन को मजबूरन अपनी कार्रवाई को बीच में ही रोककर बैरंग वापस लौटना पड़ा।

90 साल पुराना आशियाना, गोद में बच्चे लेकर बुलडोजर के आगे अड़ीं महिलाएं

तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू होते ही पूरी कॉलोनी एकजुट हो गई और विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप लेने लगा।

  • बुलडोजर पर फेंकी ईंटें: आशियाना उजड़ता देख महिलाओं और युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा। कई आक्रोशित लोगों ने पीला पंजा चला रही मशीनों पर सीधी ईंटें और पत्थर फेंकने शुरू कर दिए।

  • पुलिस से तीखी झड़प: मशीन को रोकने के लिए कई महिलाएं अपने मासूम बच्चों को गोद में लेकर बुलडोजर के टायरों के आगे अड़ गईं। हालात बेकाबू होते देख महिला पुलिसकर्मियों को मोर्चा संभालना पड़ा और उन्होंने जबरन हाथ पकड़कर प्रदर्शनकारी महिलाओं को रास्ते से किनारे किया।

  • बुजुर्गों का छलका दर्द: दशकों से रह रहे परिवारों में इस कार्रवाई को लेकर भारी रोष है। रोते हुए एक बुजुर्ग ने बेहद भावुक होकर प्रशासनिक अधिकारियों से कहा, "90 साल से हमारी तीन पीढ़ियां इस आशियाने में रह रही हैं, आज हमें सड़क पर उजाड़ने आ गए। अगर यह जमीन सरकारी है, तो जिसके नाम भी यह जमीन है उसके असली कागज हमें दिखा दो, हम खुद अपने हाथ से अपना मकान छोड़कर चले जाएंगे।"

बिना पुनर्वास छत छीनने का आरोप, कॉलोनीवासियों ने दी खुली चेतावनी

पीड़ित परिवारों का सीधा आरोप है कि नगर परिषद और जिला प्रशासन ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए उन्हें बेघर करने की कोशिश की है। लोगों ने कहा कि बिना किसी पूर्व नोटिस, पुनर्वास (Alternative Housing) या वैकल्पिक व्यवस्था किए उनके सिर से छत छीनी जा रही है, जिससे उनके बच्चे इस चिलचिलाती गर्मी और बदलते मौसम में बेघर हो जाएंगे।

कॉलोनीवासियों ने जिला प्रशासन को दो टूक शब्दों में खुली चेतावनी दी है कि जब तक सरकार उनके रहने और उन्हें कहीं और बसाने की पुख्ता व्यवस्था नहीं कर देती, तब तक वे किसी भी कीमत पर अपने घरों को टूटने नहीं देंगे, चाहे इसके लिए उन्हें कोई भी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े।

तनाव के बाद पुलिस को करना पड़ा बीच-बचाव, अधूरी कार्रवाई छोड़ लौटी टीम

मौके पर बढ़ रहे हिंसक विरोध और महिलाओं व बच्चों के भारी हुजूम को देखते हुए स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी। मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों को कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बीच-बचाव करना पड़ा। हालात को अत्यधिक संवेदनशील और तनावपूर्ण भांपते हुए नगर परिषद के अधिकारियों ने फिलहाल कुछ समय के लिए तोड़फोड़ की कार्रवाई को टालने का निर्णय लिया और पूरी टीम को वापस बुला लिया गया। नगर परिषद के पीछे हटते ही स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन इलाके में तनाव अभी भी बरकरार है।

नगर परिषद की दो टूक: नहीं रुकेगा अभियान, भारी फोर्स के साथ फिर होगी वापसी

भले ही स्थानीय लोगों के भारी विरोध के कारण नगर परिषद की टीम को शनिवार को कदम पीछे खींचने पड़े हों, लेकिन विभाग ने अपने इरादे पूरी तरह साफ कर दिए हैं। नगर परिषद के उच्च अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सरकारी जमीन पर किया गया कोई भी कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भूमि को मुक्त कराने का यह कानूनी अभियान लगातार जारी रहेगा।

अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि वे आने वाले दिनों में पूरी रणनीतिक तैयारी, भारी पुलिस अमले और विशेष रूप से अतिरिक्त महिला पुलिस बल (Women Police Force) की मांग के साथ शेष बचे हुए अवैध निर्माणों को हटाने के लिए दोबारा मौके पर पहुंचेंगे।

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