अंबाला: अनहद नाद को सुनना ही असली भक्ति, महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञान नाथ ने बताया मोक्ष का मार्ग
अंबाला, 9 अप्रैल (अन्नू): कण-कण में व्याप्त है ईश्वरीय संगीत निराकारी जागृति मिशन के महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञान नाथ महाराज ने अंबाला के कल्याणपुर आवास विकास-1 में आयोजित एक रूहानी सत्संग के दौरान श्रद्धालुओं को अध्यात्म की गहराईयों से रूबरू कराया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि असली भजन वह नहीं है जो केवल मुख से किया जाए, बल्कि 'अनहद नाद' (ओंकार ध्वनि) को सुनना ही वास्तविक भक्ति है। महाराज जी के अनुसार, यह दिव्य ध्वनि पूरे ब्रह्मांड के कण-कण में मौजूद है और इसे पहचानना ही जीवन का लक्ष्य होना चाहिए।
अंतर्मुखी होने से ही मिलेगा मोक्ष
सत्संग के दौरान महामंडलेश्वर ने मोक्ष प्राप्ति के मार्ग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जो व्यक्ति इस अलौकिक संगीत की डोर पकड़ लेता है, उसके लिए भगवत प्राप्ति का सपना सच हो जाता है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि जीवन के अंतिम समय में जो व्यक्ति इस दिव्य ध्वनि का ध्यान करते हुए शरीर त्यागता है, वही मोक्ष का असली अधिकारी बनता है। इसके लिए मनुष्य को बाहरी शोर के बजाय अपने भीतर झांकना यानी अंतर्मुखी होना अत्यंत आवश्यक है।
अमृत सिमरन और तनाव से मुक्ति
स्वामी ज्ञान नाथ महाराज ने संसार और निराकार के सिमरन के बीच का अंतर समझाते हुए कहा कि सांसारिक चीजों का चिंतन अक्सर मानसिक तनाव का कारण बनता है। इसके विपरीत, निराकार ईश्वर का ध्यान व्यक्ति को सभी सांसारिक बंधनों और दुखों से मुक्ति दिला देता है। उन्होंने 'अमृत सिमरन' की व्याख्या करते हुए बताया कि अपने वास्तविक चेतन स्वरूप का चिंतन करना ही असली सिमरन है। इस रूहानी सत्संग में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और गुरु महाराज के वचनों को सुना।
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