कसौली के जंगलों में लगी भीषण आग पर सेना और वायुसेना का काबू: सुखना झील से पानी भरकर हेलिकॉप्टरों ने की बौछारें
कसौली/चंडीगढ़, 28 मई (अन्नू): हिमाचल प्रदेश के सुप्रसिद्ध पर्यटन स्थल कसौली के जंगलों में भड़की भीषण आग पर भारतीय सेना (Indian Army) और वायुसेना (IAF) ने एक बड़े संयुक्त ऑपरेशन के बाद काफी हद तक काबू पा लिया है। दुर्गम पहाड़ियों पर लगी इस आग को बुझाने के लिए वायुसेना के हेलिकॉप्टरों ने चंडीगढ़ की प्रसिद्ध सुखना झील से पानी लिफ्ट किया और 15 घंटे से अधिक समय तक लगातार हवाई अग्निशमन (Air Firefighting) अभियान चलाया। हालांकि, प्रभावित इलाकों में अभी भी धुआं फैला हुआ है, लेकिन आग की खतरनाक लपटों को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया है।
गिल्बर्ट ट्रेल से भड़की थी आग, तेजी से रिहायशी इलाकों की तरफ बढ़ी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते 26 मई की दोपहर करीब 3:00 बजे कसौली की पश्चिमी ढलान पर स्थित गिल्बर्ट ट्रेल और अपर मॉल क्षेत्र के घने जंगलों में अचानक आग लग गई थी। चीड़ के सूखे पत्तों के कारण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और रिहायशी व संवेदनशील वन क्षेत्रों की तरफ बढ़ने लगी। स्थिति को बेकाबू होता देख स्थानीय प्रशासन ने तुरंत भारतीय सेना से मदद की गुहार लगाई।
सेना की कसौली ब्रिगेड और वायुसेना का जॉइंट ऑपरेशन, बम्बी बकेट से बरसाया पानी
प्रशासन की अपील पर तुरंत एक्शन लेते हुए सेना की कसौली ब्रिगेड ने भारतीय वायुसेना के साथ मिलकर संयुक्त राहत एवं अग्निशमन अभियान (Operation) शुरू किया:
हवाई हमला (Air Operation): भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्टरों ने चंडीगढ़ स्थित सुखना झील से विशेष बम्बी बकेट (Bambi Buckets) के जरिए पानी भरा और आसमान से कसौली के धधकते जंगलों पर कई सॉर्टीज लगाकर पानी की भीषण बौछारें कीं।
जमीनी मोर्चा: वहीं जमीन पर सेना के जवानों ने स्थानीय दमकल विभाग (Fire Tenders) और पानी के टैंकरों की मदद से मोर्चा संभाला। दुर्गम और बेहद घने जंगलों में सेना के जवान जान जोखिम में डालकर फायर ब्रेक (Fire Breaks) तैयार करते रहे, ताकि आग आगे न फैल सके।
वेस्टर्न कमांड के आर्मी कमांडर पहुंचे मौके पर, कोई हताहत नहीं
इस बेहद चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन की गंभीरता को देखते हुए वेस्टर्न कमांड के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह ने खुद कसौली के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने मौके पर पहुंचकर पूरे संयुक्त अभियान का जायजा लिया और आग बुझाने में जुटे जांबाज जवानों व वायुसेना के अधिकारियों का हौसला बढ़ाया।
राहत और सुकून की बात यह रही कि इतनी भीषण आगजनी और 15 घंटे से अधिक चले इस लंबे ऑपरेशन में किसी भी नागरिक, सेना के जवान या राहतकर्मी के हताहत (घायल) होने की कोई सूचना नहीं है। सेना की मुस्तैदी से गिल्बर्ट हिल और अपर मॉल जैसे प्रमुख और संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित बचा लिया गया है।
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