28/07/26

प्रधानमंत्री जन धन योजना में राजस्थान ने बनाई मजबूत पहचान, वित्तीय समावेशन से बदल रही लाखों जिंदगियां

एन.एस.बाछल, 28 जुलाई, जयपुर।

प्रधानमंत्री जन धन योजना प्रदेश के आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्गों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने में एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में 3 करोड़ 85 लाख 84 हजार से अधिक प्रधानमंत्री जन धन खाते खोले जा चुके हैं। प्रधानमंत्री जन धन खातों में जमा राशि के मामले में राजस्थान देशभर में चौथे स्थान पर है। इन खातों से केन्द्र एवं राज्य की डबल इंजन सरकार की लोककल्याणकारी योजनाओं का लाभ धरातल पर सुनिश्चित हो रहा है।

प्रदेश की महिलाएं खाते खुलवाने में आगे-

महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में जन धन योजना ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। राजस्थान में जन धन योजना के अंतर्गत 2 करोड़ 19 लाख से अधिक महिलाओं के खाते खोलकर उन्हें औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया है। इस तरह प्रदेश में कुल जन धन खातों में 57 प्रतिशत खाते महिलाओं के नाम हैं, जो देश के राष्ट्रीय औसत 56 प्रतिशत से भी अधिक है। विशेषकर असंगठित क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना तथा अटल पेंशन योजना जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और ऋण सुविधाओं का लाभ मिल रहा है।

औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था में बढ़ा विश्वास-

अगस्त 2014 में शुरू हुई प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खातों में जमा राशि लगातार बढ़ रही है। राजस्थान में इन खातों में 24 हजार 610 करोड़ रुपये की राशि जमा है। देशभर में पीएमजेडीवाई खातों में कुल जमा राशि 2 लाख 67 हजार 755 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था के प्रति लाभार्थियों के बढ़ते विश्वास तथा उनकी सक्रिय वित्तीय भागीदारी का प्रमाण है।

डिजिटल भुगतान को मिली नई मजबूती-

प्रदेश के जन धन खाताधारकों को 2 करोड़ 87 लाख 65 हजार से अधिक रुपे डेबिट कार्ड जारी किए गए हैं। 28 अगस्त, 2018 के बाद खोले गए जन धन खातों पर खाताधारकों को नकदी रहित लेनदेन के साथ 2 लाख रुपये की दुर्घटना बीमा सुरक्षा का लाभ भी मिल रहा है। प्रधानमंत्री जन धन योजना के अंतर्गत खाताधारकों को 10 हजार रुपये तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा, जीरो बैलेंस सुविधा तथा सरकारी योजनाओं के डीबीटी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे वित्तीय समावेशन के साथ-साथ पारदर्शी एवं प्रभावी सेवा वितरण को भी बढ़ावा मिला है।

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