26/05/26

भीलवाड़ा में प्रमुख शासन सचिव ने नवाचार आधारित खेती को बताया कृषक समृद्धि का आधार

एन.एस.बाछल, 26 मई, जयपुर।

राज्य सरकार द्वारा संचालित कृषि एवं उद्यानिकी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा कृषकों को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रमुख शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी मंजू राजपाल ने भीलवाड़ा जिले की कोटड़ी तहसील के गोविंदपुरा ग्राम का दौरा कर विभिन्न कृषि एवं उद्यानिकी योजनाओं के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने क्षेत्र के प्रगतिशील कृषकों द्वारा अपनाई जा रही उन्नत कृषि तकनीकों, संरक्षित खेती, सूक्ष्म सिंचाई एवं सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई व्यवस्थाओं का अवलोकन किया।

निरीक्षण के दौरान प्रमुख शासन सचिव ने किसान चांता देवी, धनराज माली एवं भंवर माली के खेतों का भ्रमण किया। यहां कृषकों द्वारा उद्यान विभाग की योजनाओं के अंतर्गत ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग तकनीक एवं संरक्षित खेती को अपनाते हुए मिर्ची, भिंडी, फूलगोभी तथा कुकरबिट वर्गीय फसलों की वैज्ञानिक खेती की जा रही है। कृषकों ने बताया कि सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली एवं मल्चिंग तकनीक से जल संरक्षण के साथ उत्पादन लागत में कमी आई है तथा गुणवत्तायुक्त उत्पादन प्राप्त हो रहा है, जिससे वे प्रतिवर्ष प्रति बीघा लगभग एक लाख से डेढ़ लाख रुपए तक की आय अर्जित कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि उद्यान विभाग द्वारा संचालित राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पर ड्रॉप मोर क्रॉप), सूक्ष्म सिंचाई योजना तथा संरक्षित खेती योजनाओं के माध्यम से उन्हें आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन एवं अनुदान उपलब्ध कराया गया है। सिंचाई हेतु विद्युत कनेक्शन के स्थान पर सोलर पंप संयंत्र का उपयोग किया जा रहा है, जिस पर विभाग द्वारा 75 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया गया है। इससे सिंचाई लागत में उल्लेखनीय कमी आई है तथा ऊर्जा संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है।

प्रमुख शासन सचिव ने कृषकों द्वारा स्थापित पोलीहाउस इकाई का भी निरीक्षण किया, जहां संरक्षित खेती के अंतर्गत खीरे का उत्पादन किया जा रहा है। कृषकों ने बताया कि पोलीहाउस तकनीक से वे प्रति सीजन लगभग 10 लाख रुपए का उत्पादन प्राप्त करते हैं, जिसमें लगभग 4 लाख रुपए की लागत आने के बाद 6 लाख रुपए का शुद्ध लाभ अर्जित होता है।

निरीक्षण के दौरान प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि राज्य सरकार की कृषि एवं उद्यानिकी योजनाएं कृषकों को आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म सिंचाई, संरक्षित खेती, सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई, फसल विविधीकरण, जैविक एवं उन्नत तकनीकी खेती वर्तमान समय की आवश्यकता है। इन योजनाओं के माध्यम से कृषकों के जीवन स्तर में सुधार हो रहा है तथा वे पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर नवाचार आधारित खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि कृषि विभाग एवं उद्यान विभाग की योजनाओं का अधिकाधिक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि अधिक से अधिक कृषक प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, राष्ट्रीय बागवानी मिशन, आत्मा योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, फसल विविधीकरण कार्यक्रम एवं संरक्षित खेती योजनाओं का लाभ उठा सकें। साथ ही उन्होंने कृषकों से आह्वान किया कि वे अपने अनुभव अन्य किसानों के साथ साझा कर उन्हें भी आधुनिक तकनीकों को अपनाने हेतु प्रेरित करें।

प्रमुख शासन सचिव ने उद्यान एवं कृषि विभाग के अधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि विभागीय समन्वय एवं सतत फील्ड मॉनिटरिंग से योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो रहा है। उन्होंने कृषक हित में इसी प्रकार निरंतर कार्य करते रहने के निर्देश दिए।

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