इंदौर स्थित डीएवीवी ने जनजातीय अध्ययन को एक नई दिशा दी है।
एन.एस.बाछल, 10 जून, भोपाल।
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के जनजातीय अध्ययन संकाय ने जनजातीय समाज, संस्कृति, परंपराओं और विकास के विभिन्न आयामों को समझने के लिए एक अभिनव शैक्षणिक पहल की है। विश्वविद्यालय में जनजातीय अध्ययन और जनजातीय विकास पर केंद्रित विशेष पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य छात्रों को जनजातीय समुदायों के जीवन, ज्ञान, परंपराओं, चुनौतियों और विकास की संभावनाओं से परिचित कराना है। यह पहल छात्रों में जनजातीय समाज के प्रति संवेदनशीलता विकसित करती है और उन्हें ऐसे ज्ञान और कौशल से लैस करती है जिससे वे भविष्य में जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण और विकास में सार्थक योगदान दे सकें।
जनजातीय अध्ययन संकाय में एमए (जनजातीय अध्ययन), एमबीए (जनजातीय विकास और प्रबंधन) और पीएचडी (जनजातीय अध्ययन) पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। ये पाठ्यक्रम छात्रों को जनजातीय समाज के इतिहास, संस्कृति, जीवनशैली, पारंपरिक ज्ञान, सामाजिक चुनौतियों और विकासात्मक मुद्दों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।
वर्तमान में, जनजातीय समुदायों से संबंधित विषयों पर अध्ययन और अनुसंधान की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में, ये पाठ्यक्रम छात्रों को जनजातीय विकास नीतियों, योजनाओं और प्रबंधन की व्यावहारिक समझ के साथ-साथ अकादमिक ज्ञान भी प्रदान करते हैं। इससे अनुसंधान, शिक्षा, सामाजिक विकास, नीति निर्माण और प्रशासन के क्षेत्रों में बेहतर करियर के अवसर बढ़ते हैं।
जनजातीय अध्ययन संकाय द्वारा संचालित इन पाठ्यक्रमों की मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में अपनी एक अनूठी पहचान है। जनजातीय अध्ययन में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए यह पाठ्यक्रम समाज के एक महत्वपूर्ण वर्ग को गहराई से समझने और उनके विकास में सार्थक योगदान देने का अवसर प्रदान करता है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों से इन विशेष पाठ्यक्रमों का लाभ उठाने और समय पर प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होने की अपील की है।
#Anil Vij #Haryana #bjp #india #politics #Ambala #Danik Khabar #news #current news #chandigarh #punjab #himachal #Madhya Pardesh
Previous
हरियाणा कांस्टेबल भर्ती PST पर बड़ा फैसला: 72.6% अभ्यर्थियों ने मॉर्निंग शिफ्ट को चुना, ताऊ देवीलाल स्टेडियम में तैयारियां पूरी
Next