लुधियाना धान घोटाला: 17 साल पुराने मामले में दो पूर्व कर्मचारियों को 5 साल की जेल, 2.20 करोड़ का था गबन
पंजाब/मोहाली, 26 फरवरी (अन्नू): मोहाली की एक विशेष विजिलेंस अदालत ने करीब 17 साल पुराने धान घोटाले में कड़ा फैसला सुनाते हुए पंजाब एग्रो फूड कॉरपोरेशन के दो पूर्व कर्मचारियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने लुधियाना निवासी ओमप्रकाश और मोहाली के कुराली निवासी तत्कालीन इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह को पांच-पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों दोषियों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है, जिसे न भरने की स्थिति में उन्हें अतिरिक्त समय जेल में बिताना होगा।
यह पूरा मामला साल 2005-06 का है, जिसकी जांच विजिलेंस ब्यूरो ने 2007 में शुरू की थी। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ था कि लुधियाना जिले में स्थित एक राइस मिल में सरकारी खरीद की कुल 2,74,789 धान की बोरियां भंडारण के लिए रखी गई थीं। ऑडिट और फिजिकल वेरिफिकेशन के दौरान पाया गया कि रिकॉर्ड में दर्ज बोरियों में से करीब 83,460 बोरियां गायब थीं। उस समय इस गबन की कुल राशि लगभग 2 करोड़ 20 लाख रुपये आंकी गई थी। इस भ्रष्टाचार के सामने आने के बाद विजिलेंस ने विभाग के कर्मचारियों और मिल मालिकों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा था।
मामले की सुनवाई और जांच के दौरान कई अन्य नाम भी सामने आए थे। विभाग के तत्कालीन मैनेजर श्याम सुंदर और ज्योति राइस मिल के पार्टनर ओमप्रकाश को भी इस साजिश में शामिल पाया गया था। हालांकि, लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान मैनेजर श्याम सुंदर की मृत्यु हो गई, जिससे उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त हो गई। वहीं, राइस मिल का पार्टनर ओमप्रकाश कभी जांच में शामिल नहीं हुआ और अदालत ने उसे साल 2016 में भगोड़ा (PO) घोषित कर दिया था।
अदालत ने अपने फैसले में दोनों दोषियों को आईपीसी की धारा 409 (सरकारी कर्मचारी द्वारा विश्वासघात) और 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत सजा सुनाई है। इसके अलावा, कुलदीप सिंह को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत भी दोषी ठहराया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी और दोषियों द्वारा ट्रायल के दौरान पहले काटी गई जेल की अवधि को मुख्य सजा में से कम कर दिया जाएगा। यह फैसला सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
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