"शौर्य दल" देश की 22 लाख महिलाओं की सबसे बड़ी मूक सेना है : मध्यप्रदेश
एन.एस.बाछल, 10 जून, भोपाल।
मध्य प्रदेश के गांवों और शहरों की गलियों से गुजरते हुए, अगर आपको साड़ी या पल्लू पहने और कॉलेज बैग लिए महिलाओं का कोई समूह दिखाई दे , तो उन्हें राहगीर समझ लीजिएगा। ये मध्य प्रदेश की ' शौर्य दल सेना ' है - समाज की ' संरक्षक ' , जो आज देश में महिला सशक्तिकरण की सबसे बड़ी आवाज बन चुकी है और जिसने महिला सशक्तिकरण की परिभाषा को कागज से निकालकर जमीन पर साकार कर दिया है। यह कारवां 2013 में केवल 6 जिलों से शुरू हुआ था और आज राज्य के हर कोने में फैल चुका है , जिसके चलते सरकार ने इसे अगले 5 वर्षों (2026-27 से 2030-31) तक लगातार जारी रखने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
अपराध पर ' प्रवेश पूर्व प्रतिबंध ' : पुलिस से पहले ही ' जबंज टीम ' यहाँ पहुँच चुकी है
शौर्य दल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे अपराध होने के बाद ही मोमबत्ती नहीं जलाते , बल्कि अपराध होने से पहले ही अपराधी की कमर तोड़ देते हैं। अगर किसी घर में घरेलू हिंसा का पता चलता है , किसी गांव में गुपचुप तरीके से बाल विवाह के मंडप आयोजित किए जा रहे हैं , या मानव तस्करी का कोई संदेह होता है , तो शौर्य दल का खुफिया नेटवर्क तुरंत सक्रिय हो जाता है। 15 से 45 वर्ष की आयु की ये बहादुर महिलाएं पुलिस और कानून के हस्तक्षेप से पहले ही के अपने ब्रह्मास्त्र से बड़े-बड़े मामलों को शांतिपूर्वक सुलझा लेती हैं'सामुदायिक समझौता'
22 लाख से ज्यादा चाबियां ' साइलेंट आर्मी ', जहां किशोरी और गृहिणी हैं एक साथ
यह शायद देश का सबसे अनूठा और विशाल सामाजिक नेटवर्क है , जिससे वर्तमान में 22.52 लाख से अधिक महिलाएं और लड़कियां सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं। इस ताकत की खूबसूरती देखिए - एक तरफ 7.64 लाख कॉलेज और स्कूल जाने वाली नई पीढ़ी की लड़कियां हैं, जिनके पास तकनीकी और आधुनिक विचार हैं , वहीं दूसरी तरफ 14.88 लाख अनुभवी गृहिणियां और बुजुर्ग महिलाएं हैं जो समाज के उतार-चढ़ाव से भली-भांति परिचित हैं। जब युवा जोश और अनुभव का बोलबाला होता है , तो उन्हें पुरानी सोच और नकारात्मक सामाजिक दृष्टिकोण के आगे घुटने टेकने पड़ते हैं।
आदिवासी इलाकों से लेकर शहरों तक हक की हुंकार
महिला एवं बाल विकास विभाग की इस पहल ने सुदूर आदिवासी क्षेत्रों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक की महिलाओं को अपनी बाधाओं को तोड़कर खुलकर सांस लेने का मौका दिया है। आज शौर्य दल सिर्फ एक सुरक्षा कवच नहीं है , बल्कि स्वास्थ्य ,सजा, पोषण, , बल्कि अपने मौलिक अधिकारों के लिए लड़ना सीख चुकी हैं।
मध्य प्रदेश देश के लिए एक नया आदर्श बन गया है ।
शौर्य दल ने यह साबित कर दिया है कि महिलाओं का वास्तविक सशक्तिकरण तभी संभव है जब सत्ता की बागडोर स्वयं महिलाओं के हाथों में हो। समाज की नकारात्मक सोच और रूढ़ियों पर प्रहार करते हुए, मध्य प्रदेश का यह ' शौर्य मॉडल ' आज पूरे देश के लिए एक मिसाल है , जो यह संदेश देता है कि जब महिलाएं स्वयं और समाज की रक्षक बन जाती हैं , तो बदलाव को कोई नहीं रोक सकता।
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