राजस्थान एनर्जी सरप्लस स्टेट बनने की ओर अग्रसर,दो साल से प्रदेश में बिजली की कोई लोड शैडिंग नहीं -ऊर्जा मंत्री
एन.एस.बाछल, 05 जून, जयपुर।
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि राज्य सरकार बिजली का लगातार बेहतर प्रबंधन कर रही है। प्रदेश में मांग के अनुरूप पर्याप्त बिजली उपलब्ध है। स्वयं के स्रोतों से उत्पादन बढ़ा है, जिससे एनर्जी एक्सचेंज पर निर्भरता कम हो रही है। उन्होंने कहा कि पिछले दो साल से प्रदेश में बिजली की कोई लोड शैडिंग नहीं हुई।
हीरालाल नागर विद्युत भवन में मीडिया प्रतिनिधियों से ऊर्जा विभाग की गतिविधियों एवं योजनाओं पर चर्चा कर रहे थे।
एनर्जी एक्सचेंज पर कम हो रही निर्भरता—
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान एनर्जी सरप्लस स्टेट बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने बताया कि गर्मी की डिमांड को पूरा करने के लिए गत वर्ष अप्रेल माह में 2883 लाख यूनिट तथा मई माह में 8,273 लाख यूनिट बिजली एनर्जी एक्सचेंज से परचेज की गई थी। जबकि इस वर्ष अप्रेल में मात्र 214 लाख यूनिट तथा मई में मात्र 2804 लाख यूनिट बिजली ही खरीदी गई। इस वर्ष दोनों माह में कुल 8138 लाख यूनिट बिजली कम खरीदी गई और स्वयं के स्त्रोतों से उपलब्धता बढ़ायी है।
हीरालाल नागर ने कहा कि हम एनर्जी एक्सचेंज को बिजली बेच भी रहे हैं। इस वर्ष अप्रेल में 1140 लाख यूनिट तथा मई में 417 लाख यूनिट बिजली लगभग 10 रूपए प्रति यूनिट की दर से बेची भी गई है।
पीक डिमांड को पूरा करने के लिए विकसित कर रहे बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली—
हीरालाल नागर ने बताया कि कुसुम-2.0 में भारत सरकार ने राजस्थान को 6 हजार मेगावाट सोलर पावर क्षमता आवंटित करने के लिए आश्वस्त किया है। इसमें बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम भी सौर ऊर्जा संयंत्र के साथ लगाया जाएगा। स्वच्छ ऊर्जा के माध्यम से प्रदेश की पीक डिमांड को पूरा करने में यह उपयोगी साबित होगी। उन्होंने बताया कि बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित करने की दिशा में राजस्थान तेजी से अग्रसर है। पूगल के निर्माणाधीन सोलर पार्क में 2450 मेगावाट सोलर के साथ 6 हजार मेगावाट ऑवर की बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने की निविदा प्रक्रिया में है। वहीं उत्पादन निगम द्वारा कुल 6 हजार मेगावाट ऑवर की बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाएं चरणबद्ध रूप से विकसित की जा रही हैं। जिन्हें सितम्बर, 2027 तक पूर्ण किए जाने का लक्ष्य है।
हीरालाल नागर ने कहा कि रात्रि को पीक डिमांड में बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 33 केवी सब स्टेशनों एवं वितरण ट्रांसफार्मरों पर स्टैंडअलोन बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित करने जा रहे हैं। इससे दिन में उपलब्ध अतिरिक्त सौर उर्जा को संग्रहित किया जाएगा और शाम को पीक डिमांड के समय उपयोग किया जा सकेगा। इससे वोल्टेज लेवल में भी सुधार होगा। फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में यह कार्य तीनों विद्युत वितरण निगमों में जल्द ही प्रारंभ होगा। सकारात्मक परिणामों के आधार पर इसे वृहद् रूप में भी लागू करेंगे।
थर्मल इकाइयों से अब तक का सर्वाधिक उत्पादन—
हीरालाल नागर ने कहा कि प्रदेश की कोयला आधारित 23 इकाइयों ने 2 जून को क्षमता का 94.60 प्रतिशत अर्थात् 7171 मेगावाट विद्युत उत्पादन हासिल किया है। यह अब तक का सर्वाधिक विद्युत उत्पादन है। थर्मल प्लांटों का बेहतर रखरखाव होने सेे प्लांटों की क्षमता का 78 से 82 प्रतिशत तक विद्युत उत्पादन अर्जित कर रहे हैं। इस वर्ष अप्रैल एवं मई में इन इकाइयों से विद्युत उपलब्धता 84.34 प्रतिशत रही है जो कि गत वर्ष के 77.90 प्रतिशत से 6.50 प्रतिशत तक अधिक है।
शेष 15 जिलों में भी 2 ब्लॉक सप्लाई का रोडमैप तैयार—
हीरालाल नागर ने बताया कि 26 जिलों में किसानों को दिन के दो ब्लॉक में बिजली आपूर्ति की जा रही है। शेष 15 जिलों को भी दो ब्लॉक सप्लाई से जोड़ने का रोडमैप तैयार कर लिया है। इसके लिए विद्युत तंत्र को मजबूत कर रहे हैं। डिस्कॉम एवं प्रसारण संबंधी कुल 1109 बाधाएं चिन्हित कर उन्हें चरणबद्ध रूप से दूर किया जा रहा है। मात्र ढाई साल में 400 केवी 220 केवी तथा 132 केवी के 60 ग्रिड सब स्टेशन बनाए गए हैं।
ग्रीष्मकालीन मांग का बेहतर प्रबंधन—
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि गर्मी में बिजली आपूर्ति का बेहतर प्रबंधन किया जा रहा है। इस वर्ष ग्रीष्म में अब तक की सर्वाधिक मांग 17,333 मेगावाट (27 मई को रात 10ः30 बजे) रही है, जबकि उपलब्धता 17,353 मेगावाट थी। इसका अर्थ यह है कि सर्वाधिक मांग को भी बिना किसी कटौती के पूरा किया गया है।
हीरालाल नागर ने बताया कि वितरण निगमों ने गर्मियों में उपभोक्ताओं की नो करंट संबंधी समस्याओं के त्वरित निराकरण का समुचित प्रबंध किया है। केन्द्रीकृत कॉल सेंटर 24 घंटे कार्यरत हैं। सर्किल, डिविजन एवं सब डिविजन स्तर पर कंट्रोल रूम के माध्यम से लोगों की शिकायतों को दर्ज कर उनका समाधान किया जा रहा है। सोशल मीडिया माध्यम एक्स, व्हॉटसएप, 181 हैल्पलाइन आदि से भी समस्याएं प्राप्त होती हैं और 1129 एफआरटी टीमों के जरिए उनका त्वरित निराकरण किया जाता है। एफआरटी गाडियों की जीपीएस से ट्रेकिंग की जा रही है।
गत वर्ष से कम हुईं ‘नो करंट‘ की शिकायतें—
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि जयपुर डिस्कॉम में गत वर्ष 1 अप्रेल से 2 जून के मध्य कुल 2 लाख 33 हजार 775 शिकायतें दर्ज हुई थीं जो इस वर्ष इसी अवधि में 1 लाख 68 हजार 914 रह गई हैं। इसका सीधा अर्थ है कि आपूर्ति एवं वोल्टेज में सुधार होने से शिकायतों की संख्या में कमी आई है।
अभियंताओं की कॉल सेंटर पर दिन के 24 घंटे में विभिन्न पारियों में ड्यूटी लगाई गई है। रात्रि में ट्रांसफार्मरों पर लोड की चेकिंग एवं बैलेंसिंग के लिए अभियंता ड्यूटी पर मौजूद रहते हैं। उन्होंने बताया कि हम इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पब्लिक चार्जिंग स्टेशन को भी प्रमोट कर रहे हैं। प्रदेश में 350 स्थानों पर कुल 805 ईवी चार्जिंग स्टेशन लागने जा रहे हैं। इससे राज्य में ईवी चार्जिंग के आधारभूत ढांचे को मजबूती मिलेगी।
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