आयुर्वेद के क्षेत्र में अजमेर की बड़ी छलांग, रसायनशाला में बनी दवाएं पूरे राज्य में वितरित होंगी : राजस्थान
एन.एस.बाछल, 04 अगस्त, जयपुर।
सावन का पहला सोमवार अजमेर के लिए बेहद शुभ रहा। अजमेर की शान रही आयुर्वेद रसायनशाला एक बार फिर से राजस्थान की धुरी बन गई। यहां आधुनिक तकनीक से बनने वाली दवाएं पूरे राज्य के आयुर्वेद अस्पतालों में वितरित की जाएंगी। राज्य सरकार की ‘‘राइजिंग राजस्थान नीति के तहत पीपीपी मोड पर राजस्थान आयुष विभाग एवं दीनदयाल आयुर्वेद इस रसायनशाला को पूरी तरह अत्याधुनिक मशीनों के साथ ऑपरेट करेंगे। इसके साथ ही यह रसायनशाला प्रदेश की उन पांच रसायनशालाओं में शामिल हो गई, जिन्हें अत्याधुनिक तकनीक से विकसित किया जा रहा है।
अजमेर आयुर्वेद रसायनशाला के ऑटोमेशन का सोमवार को भव्य शुभारम्भ हुआ। राज्य सरकार और दीनदयाल आयुर्वेद मिल कर पीपीपी मोड पर इसे संचालित करेंगे। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी प्राचीन ज्ञान परम्परा और आयुर्वेद है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ने विश्व को विज्ञान, दर्शन, गणित, खगोल और आयुर्वेद जैसी अमूल्य धरोहर प्रदान की है। तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालयों में अध्ययन करने के लिए विश्वभर से विद्यार्थी भारत आते थे। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत पुनः उसी गौरवशाली परम्परा को स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने इस परियोजना के लिए करोड़ों रुपये की महत्वपूर्ण सौगात दी है। यह परियोजना केवल रसायनशाला का आधुनिकीकरण नहीं बल्कि परम्परा और भविष्य के बीच आधुनिक तकनीक का सशक्त सेतु है।
उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान आयुर्वेद ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आज आयुर्वेद, योग और आयुष को वैश्विक पहचान मिली है तथा लोकल टू ग्लोबल की अवधारणा को साकार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की बजट घोषणा के अंतर्गत अजमेर सहित पांच आयुर्वेद रसायनशालाओं का ऑटोमेशन किया जा रहा है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के सचिव एवं पद्मश्री वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में राजस्थान को 440 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश में लगभग तीन करोड़ मरीज आयुर्वेद चिकित्सा से लाभान्वित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राजस्थान में आयुर्वेद विश्वविद्यालय के विकास के लिए केन्द्र सरकार की ओर से 70 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले वर्षों में आयुर्वेद के क्षेत्र में लगभग 800 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो इस क्षेत्र में बढ़ते विश्वास और वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है।
राज्य के आयुष विभाग के शासन सचिव सुबीर कुमार ने कहा कि राजस्थान सरकार आयुर्वेद को नई पहचान देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पीपीपी मॉडल के माध्यम से गुणवत्ता, आधुनिक उत्पादन प्रणाली और सुदृढ़ आपूर्ति व्यवस्था विकसित की जाएगी।
इस अवसर पर आयोजित समारोह में आयुर्वेद निदेशक आनंद शर्मा ने आभार जताया। कार्यक्रम में संयुक्त निदेशक ज्योति ककवानी, एमडीएस यूनिवर्सिटी के कुलगुरू प्रो. सुरेश अग्रवाल एवं दीनदयाल आयुर्वेद के पदाधिकारी सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं आयुष क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
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