पूर्वोत्तर को बड़ी उपलब्धि: मिजोरम विश्वविद्यालय का NHM बना भारत का 21वां निर्दिष्ट जैव भंडार
आरएस अनेजा, 7 जुलाई नई दिल्ली - भारत में जैव विविधता संरक्षण और वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने मिजोरम यूनिवर्सिटी, आइजोल के Natural History Museum (NHM) को देश का 21वां Designated Repository घोषित किया है।
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (National Biodiversity Authority) की सिफारिश और प्रस्ताव की समीक्षा के बाद 19 जून 2026 को इसे Biological Diversity Act, 2002 की धारा 39 के तहत Designated Repository के रूप में अधिसूचित किया।
Designated Repository भारत की जैव विविधता व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां प्रमाणित जैविक नमूनों को सुरक्षित रखा जाता है। इससे वैज्ञानिक अध्ययन, प्रजातियों की पहचान और लंबे समय तक संरक्षण में मदद मिलती है।
मिजोरम का NHM पौधों और जीव-जंतुओं के कई महत्वपूर्ण नमूनों को संरक्षित करेगा। इनमें टेरिडोफाइट्स, मैक्रोफंगी, सरीसृप, उभयचर, मछलियां, पतंगे, बीटल और तितलियां जैसी प्रजातियां शामिल होंगी।
इसके अलावा यह संग्रहालय क्षेत्र में खोजी जाने वाली नई प्रजातियों के टाइप स्पेसिमेन को सुरक्षित रखने का केंद्र भी बनेगा। इससे भविष्य में वैज्ञानिक शोध और जैविक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
साल 2022 में स्थापित NHM, मिजोरम यूनिवर्सिटी के तहत काम करता है। इसका स्थान Indo-Burma Biodiversity Hotspot क्षेत्र में होने के कारण इसे विशेष महत्व प्राप्त है।
मिजोरम और पूर्वोत्तर भारत में 7,500 से ज्यादा फूलों वाले पौधों और 2,000 से अधिक जीव प्रजातियों की मौजूदगी पाई जाती है। ऐसे में यह संग्रहालय क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता के दस्तावेजीकरण में अहम भूमिका निभाएगा।
NHM क्षेत्र की दुर्लभ और स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण में भी मदद करेगा। इनमें मिजोरम के जंगलों में खोजी गई उभयचर प्रजाति Leptobrachella tamdil जैसी नई प्रजातियां भी शामिल हैं।
Designated Repository बनने से पहले ही NHM ने 500 से अधिक जैविक नमूनों को इकट्ठा और संरक्षित किया है। इसके विशेषज्ञ पौधों, मछलियों, कीटों और अन्य जैविक समूहों पर शोध कर रहे हैं।
यह कदम भारत के जैव विविधता संरक्षण नेटवर्क को और मजबूत करेगा। इससे स्थानीय स्तर पर नमूनों को सुरक्षित रखने, शोध को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने में मदद मिलेगी।
यह पहल भारत की National Biodiversity Strategy and Action Plan (2024-2030) और वैश्विक जैव विविधता संरक्षण लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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