चंडीगढ़ में वेंडरों को शिफ्ट करने के लिए नगर निगम ने निकाला ड्रॉ, कार्यालय के बाहर भारी हंगामा और नारेबाजी
अभिकान्त, 18 जुलाई चंडीगढ़ : सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक आदेश के अनुपालन में शनिवार को चंडीगढ़ नगर निगम ने 'आवश्यक सेवा प्रदाता' का दर्जा खो चुके रेहड़ी-फड़ी विक्रेताओं को नए वेंडिंग जोन में स्थानांतरित (शिफ्ट) करने के लिए एक विशेष ड्रॉ निकाला। हालांकि, जैसे ही इस ड्रॉ की प्रक्रिया शुरू हुई, नगर निगम कार्यालय के बाहर सैकड़ों की संख्या में वेंडरों ने एकत्रित होकर भारी हंगामा किया और निगम प्रशासन व अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वेंडरों का सीधा आरोप था कि ड्रॉ की इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई है।
नगर निगम के संयुक्त आयुक्त (ज्वाइंट कमिश्नर) हिमांशु गुप्ता ने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के तहत ही शनिवार को करीब 498 पंजीकृत वेंडरों के लिए स्थान आवंटन का ड्रॉ निकाला गया है। दूसरी ओर, वेंडरों का कहना है कि वे पिछले 15 से 20 वर्षों से शहर के एक ही सेक्टर में अपनी रेहड़ी लगाकर ईमानदारी से आजीविका चला रहे हैं, लेकिन अब उन्हें उनके वर्तमान कार्यस्थल से कई किलोमीटर दूर दूसरे सेक्टरों में जगह आवंटित की जा रही है, जिससे उनका जमा-जमाया रोजगार पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।
इस विरोध प्रदर्शन में शामिल 50 से 60 वर्ष की आयु की कई बुजुर्ग महिला वेंडरों ने प्रशासन के इस कदम पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अकेले रेहड़ी चलाने वाली इन महिलाओं का कहना है कि इस उम्र में उनके लिए रोजाना कई किलोमीटर दूर जाकर नया बाजार तलाशना और रेहड़ी खींचना व्यावहारिक रूप से असंभव है। एक महिला वेंडर ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि वर्षों की मेहनत के बाद पुराने सेक्टर में उनके नियमित ग्राहक और पहचान बनी थी, जिसे प्रशासन ने एक झटके में खत्म कर दिया।
टाउन वेंडिंग कमेटी (TVC) के सदस्य मुकेश गिरी ने भी नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए वेंडरों के सुर में सुर मिलाया। उन्होंने कहा कि नगर निगम के अधिकारी जमीनी हकीकत को समझे बिना अपने स्तर पर मनमाने फैसले ले रहे हैं। मुकेश गिरी ने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट को इस पूरे मामले में एक स्वतंत्र समिति (Independent Committee) गठित करनी चाहिए, जो जमीनी स्तर पर जाकर वेंडरों की वास्तविक स्थिति का आकलन करे और प्रशासन को उनकी उम्र व आजीविका की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ही स्थान आवंटित करने के निर्देश दे।
गौरतलब है कि करीब 17 दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन की 17 जुलाई 2020 की उस पुरानी अधिसूचना को पूरी तरह रद्द कर दिया था, जिसके तहत छोले-भटूरे, कुलचे-छोले, परांठे, तंदूर संचालकों, फल-सब्जी विक्रेताओं और धार्मिक स्थलों के बाहर फूल बेचने वालों को 'आवश्यक सेवा प्रदाता' (एसेंशियल सर्विस प्रोवाइडर) का विशेष संरक्षण मिला हुआ था। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया था कि यह रियायत केवल कोरोना महामारी के दौरान तात्कालिक राहत के रूप में दी गई थी, जिसे महामारी खत्म होने के बाद जारी रखने का कोई कानूनी आधार नहीं है।
अदालत ने केवल शिफ्टिंग के ही आदेश नहीं दिए थे, बल्कि चंडीगढ़ प्रशासन को यह भी पाबंद किया था कि सभी निर्धारित वेंडिंग जोन में पीने का साफ पानी, शौचालय, संकेतक बोर्ड (Signboards) और अन्य मूलभूत नागरिक सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएं। इसके अलावा, सभी अधिकृत रेहड़ी-फड़ी संचालकों को डिजिटल 'स्मार्ट कार्ड' जारी करने, सुरक्षा के मद्देनजर छह महीने के भीतर वेंडिंग जोन में सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाने और सभी लंबित मामलों का समयबद्ध निपटारा करने के भी सख्त निर्देश दिए गए थे।
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