पारिवारिक पेंशन पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: एकमात्र जीवित दावेदार होने पर दूसरी पत्नी को मिलेगा पूर्ण लाभ
अभिकान्त, 18 जून चंडीगढ़ : पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पारिवारिक पेंशन को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और नजीर बनने वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि किसी मृत सरकारी कर्मचारी की दूसरी पत्नी को केवल इसी आधार पर पूरी पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता कि वह दूसरी पत्नी है, विशेषकर तब जब वह कर्मचारी की एकमात्र जीवित और पात्र दावेदार हो। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि एकमात्र विधवा होने के बावजूद पेंशन को 50 फीसदी तक सीमित करना नियमों की पूरी तरह से गलत व्याख्या है। जस्टिस नमित कुमार की एकल पीठ ने गुरदासपुर निवासी एक महिला की याचिका को स्वीकार करते हुए सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें उसे केवल आधी पेंशन का हकदार माना गया था। इसके साथ ही अदालत ने संबंधित विभाग को पीड़िता को पूर्ण पारिवारिक पेंशन जारी करने और बकाया राशि का भुगतान ब्याज सहित करने का कड़ा निर्देश दिया है।
मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता महिला के पति पंजाब सरकार में जिला कोषागार अधिकारी के पद पर तैनात थे और उनका निधन 14 नवंबर 2011 को हुआ था। कर्मचारी की पहली पत्नी का देहांत बहुत पहले 6 नवंबर 1980 को हो चुका था, जिसके बाद याचिकाकर्ता का विवाह 30 मई 1992 को उनके साथ हुआ था। पति की मृत्यु के बाद पंजाब के महालेखाकार (एजी) कार्यालय ने 3 अगस्त 2015 को एक आदेश जारी कर याचिकाकर्ता के लिए केवल 50 फीसदी पारिवारिक पेंशन स्वीकृत की थी और इसके पीछे तर्क दिया गया था कि वह मृत कर्मचारी की दूसरी पत्नी हैं। इस फैसले के खिलाफ महिला ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के समय याचिकाकर्ता ही उनकी एकमात्र जीवित पत्नी और कानूनी वारिस थीं। अदालत ने विभाग की खिंचाई करते हुए कहा कि एक से अधिक जीवित विधवाओं के बीच पेंशन बंटवारे का नियम इस मामले में बिल्कुल लागू नहीं होता क्योंकि पहली पत्नी का निधन कर्मचारी की सेवाकाल के दौरान ही हो गया था। विभाग की इस गलत व्याख्या के कारण पेंशन का आधा हिस्सा बिना किसी लाभार्थी के सरकारी खाते में ही अटका रह गया, जो कि लोक कल्याणकारी पारिवारिक पेंशन योजना की मूल भावना और नियमों के सर्वथा विपरीत है। हाईकोर्ट ने कानून को स्पष्ट करते हुए दोहराया कि यदि कोई अन्य दावेदार जीवित नहीं है, तो मृत कर्मचारी की दूसरी पत्नी को शत-प्रतिशत पूर्ण पेंशन का लाभ दिया जाएगा।
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