लखनऊ: करोड़ों के एलआईसी (LIC) घोटाले का मुख्य आरोपी गिरफ्तार, 12 साल बाद CBI के हत्थे चढ़ा भगोड़ा समीर जोशी
लखनऊ, 1 अप्रैल (अन्नू): केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए करोड़ों रुपये के वित्तीय धोखाधड़ी मामले में घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) समीर जोशी को गिरफ्तार कर लिया है। समीर जोशी पर भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के फंड में हेराफेरी करने का आरोप है। सीबीआई की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपी को 31 मार्च 2026 को लखनऊ के एक मेट्रो स्टेशन से दबोचा।
₹6.37 करोड़ का फर्जीवाड़ा
यह मामला साल 2012 में एलआईसी लखनऊ की शिकायत पर दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि फरवरी 2006 से अगस्त 2010 के बीच लखनऊ के जानकीपुरम स्थित एलआईसी कार्यालय में भारी वित्तीय अनियमितताएं की गईं। आरोपियों ने अस्तित्वहीन (Non-existent) पॉलिसी धारकों के नाम पर फर्जी चेक तैयार किए और एलआईसी के फंड से ₹6,37,66,660 की हेराफेरी की। इस घोटाले को छिपाने के लिए बही-खातों में भी बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया था।
साजिश और धोखाधड़ी का तरीका
सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, समीर जोशी ने एलआईसी के तत्कालीन हायर ग्रेड असिस्टेंट पंकज सक्सेना के साथ मिलकर इस साजिश को अंजाम दिया। समीर जोशी, उसकी पत्नी अंजू जोशी और उसके कर्मचारी जितेंद्र कुमार के नाम पर फर्जी चेक जारी किए गए। इन फर्जी चेकों के जरिए लगभग ₹62 लाख की राशि भुनाई गई, जिसे आरोपियों ने आपस में बांट लिया था।
जमानत के बाद हुआ था फरार
समीर जोशी को जांच के दौरान पहले भी गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में उसे जमानत मिल गई थी। जमानत पर बाहर आने के बाद वह अदालती कार्यवाही से बचकर भाग निकला और लंबे समय तक फरार रहा। जिसके बाद, 24 दिसंबर 2025 को अदालत ने उसे 'घोषित अपराधी' (PO) करार दिया था।
31 मार्च 2026 को गिरफ्तारी के बाद आरोपी को संबंधित ट्रायल कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इस मामले में सीबीआई पहले ही 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
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