विनेश फोगाट की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा कदम: WFI और केंद्र सरकार को नोटिस, 6 जुलाई तक मांगा जवाब
अभिकान्त, 18 मई नई दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्टार पहलवान विनेश फोगाट की याचिका पर सुनवाई करते हुए भारतीय कुश्ती संघ (WFI) और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब तलब किया है।
विनेश फोगाट ने डब्ल्यूएफआई द्वारा उन्हें जारी किए गए कारण बताओ नोटिस (शो-कॉज नोटिस), अयोग्य घोषित किए जाने के फैसले और आगामी एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में उनका नाम शामिल न करने की नीति को अदालत में चुनौती दी थी। हालांकि, न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की पीठ ने महासंघ का पक्ष सुने बिना विनेश फोगाट को आगामी 30-31 मई को होने वाले एशियाई खेल ट्रायल्स में भाग लेने के लिए कोई भी तत्काल अंतरिम राहत देने से साफ इनकार कर दिया है।
अदालत में सुनवाई के दौरान विनेश फोगाट के वरिष्ठ वकील ने दलील दी कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मातृत्व अवकाश (मैटर्निटी लीव) पर जाने वाली महिला एथलीटों की रैंकिंग और स्थिति को सुरक्षित रखा जाता है, लेकिन डब्ल्यूएफआई की नई नीति के तहत उन्हें दुर्भावनापूर्ण तरीके से ट्रायल्स से बाहर कर दिया गया है।
कुश्ती महासंघ के अनुसार, विनेश फोगाट को अनुशासनहीनता, डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघन और संन्यास के बाद वापसी की तय प्रक्रिया (6 महीने की अग्रिम सूचना अवधि) का पालन न करने के आरोपों के चलते 26 जून 2026 तक घरेलू प्रतियोगिताओं के लिए अयोग्य घोषित किया गया है। साथ ही, डब्ल्यूएफआई ने चयन ट्रायल के लिए पात्रता केवल 2025 और 2026 की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के पदक विजेताओं तक ही सीमित रखी थी, जिसमें विनेश ने हिस्सा नहीं लिया था। विनेश के वकील ने आरोप लगाया कि एक प्रतियोगिता से मात्र 12 घंटे पहले उन्हें नोटिस थमाना यह दर्शाता है कि मामले में पर्दे के पीछे कुछ और ही चल रहा है।
हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए कहा कि किसी भी खिलाड़ी को अंतरिम तौर पर सीधे ट्रायल में शामिल होने की अनुमति देकर बाद में उसे अमान्य घोषित करने का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने टिप्पणी की कि हम इस बात का सम्मान करते हैं कि खिलाड़ी मातृत्व अवकाश पर थीं, लेकिन इसके साथ ही राष्ट्रीय हितों और नियमों की अवहेलना नहीं की जा सकती।
अदालत ने विनेश फोगाट को कुश्ती संघ के शो-कॉज नोटिस पर अपना एक व्यापक और विस्तृत जवाब दाखिल करने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही, डब्ल्यूएफआई को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे इस पूरी अनुशासनात्मक कार्रवाई को आगामी 6 जुलाई 2026 तक तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचाएं और अपने अंतिम फैसले को अदालत के रिकॉर्ड पर पेश करें, जिसके बाद ही मामले की अगली सुनवाई होगी।
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