18/05/26

कैंसर रिसर्च में डीयू की बड़ी छलांग: जूलॉजी विभाग में स्थापित होगा एआई-मशीन लर्निंग आधारित एडवांस इमेजिंग सिस्टम

अभिकान्त, 18 मई नई दिल्ली :  दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) का जूलॉजी (प्राणि विज्ञान) विभाग कैंसर अनुसंधान और चिकित्सा खोज के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विभाग की प्रसिद्ध 'मॉलिक्यूलर ऑन्कोलॉजी लैब' में जल्द ही दुनिया की अत्याधुनिक तकनीकों में शुमार 'हाई-कंटेंट ऑटोमेटेड कन्फोकल इमेजिंग, स्क्रीनिंग एंड एनालिसिस सिस्टम' (High-Content Automated Confocal Imaging, Screening and Analysis System) स्थापित किया जाएगा। इस विश्वस्तरीय प्रणाली के आने से भारत में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के कारणों को समझने और उसकी अचूक दवाएं खोजने के अभियान को एक नई और अभूतपूर्व रफ्तार मिलेगी।

इस क्रांतिकारी तकनीक की मदद से वैज्ञानिक और शोधकर्ता कैंसर कोशिकाओं (Cancer Cells) और ट्यूमर के बढ़ने के तौर-तरीकों व उनके व्यवहार का बेहद सूक्ष्म यानी सेलुलर और मॉलिक्यूलर स्तर पर गहन अध्ययन कर सकेंगे। वर्तमान में पारंपरिक प्रणालियों से इस तरह का सटीक विश्लेषण करने में लंबा वक्त लगता था, लेकिन इस ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए नई दवाओं के परीक्षण और नई उपचार पद्धतियों (Therapies) के विकास को गति मिलने की पूरी उम्मीद है। यह प्रणाली कैंसर अनुसंधान के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी क्योंकि इससे यह साफ-साफ देखा जा सकेगा कि कोई भी खोजी जा रही दवा कैंसर कोशिकाओं पर किस तरह और कितनी तेजी से असर कर रही है।

दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा इस अत्याधुनिक सिस्टम के लिए जारी किए गए आधिकारिक एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) के अनुसार, यह नई प्रणाली 2D (टू-डायमेंशनल) के साथ-साथ जटिल 3D (थ्री-डायमेंशनल) सेल कल्चर की 'हाई-थ्रूपुट इमेजिंग' करने में पूरी तरह सक्षम होगी। इस सिस्टम की सबसे बड़ी और खास विशेषता यह है कि यह पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML) और डीप लर्निंग आधारित उन्नत विश्लेषण सॉफ्टवेयर से लैस होगा। इस एआई-संचालित तकनीक की बदौलत वैज्ञानिक और शोधकर्ता बिना किसी मानवीय त्रुटि के हजारों-लाखों कैंसर कोशिकाओं का स्वतः और बेहद सटीक विश्लेषण (Automated Analysis) कर सकेंगे। डीयू के जूलॉजी विभाग की यह आधुनिक पहल न केवल विश्वविद्यालय को वैश्विक शोध पटल पर एक नई पहचान दिलाएगी, बल्कि देश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भी एक बड़ा वरदान साबित होगी।

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