नकली और घटिया दवाओं पर CDSCO का शिकंजा: बद्दी की 82 सहित देशभर में 240 मेडिसिन अमानक घोषित

शिमला/बद्दी, 22 अगस्त (अभिकान्त) :  केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की ओर से जारी हालिया ड्रग अलर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। देशभर में गुणवत्ता जांच के दौरान 240 दवाओं के सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं, जिनमें से लगभग एक-तिहाई हिस्सेदारी (82 दवाएं) अकेले हिमाचल प्रदेश के उद्योगों में निर्मित पाई गई हैं।

इनमें से भी 52 दवाएं बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (BBN) औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों में तैयार की गई थीं। बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, पांवटा साहिब, कालाअंब, मोगीनंद, मैहतपुर, बाथू-हरोली, नूरपुर, संसारपुर टैरेस, कुमारहट्टी और सुबाथू स्थित उद्योगों में बनी इन दवाओं के सैंपल नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी (NSQ) पाए जाने से एशिया के इस प्रमुख फार्मा केंद्र की साख पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जांच में असफल रही दवाओं की सूची में कई अति-आवश्यक और जीवनरक्षक दवाएं शामिल हैं। बैक्टीरियल संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एमोक्सिसिलिन, एमोक्सिसिलिन-पोटेशियम क्लैवुलनेट, सेफिक्सिम, सेफपोडोक्सिम, ऑफ्लॉक्सासिन और एजिथ्रोमाइसिन जैसी प्रमुख एंटीबायोटिक दवाएं गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं।

इसके अलावा दिल के मरीजों में ब्लड क्लॉट का खतरा कम करने, कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने और हाई ब्लड प्रेशर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली क्लोपिडोग्रेल-एस्पिरिन, एटोरवास्टेटिन-क्लोपिडोग्रेल और कार्वेडिलोल जैसी दवाओं के साथ-साथ डायबिटीज की दवा ग्लिक्लाजाइड के सैंपल भी फेल पाए गए हैं।

ड्रग अलर्ट रिपोर्ट में क्रीम, ऑइंटमेंट, इंजेक्शन और सप्लीमेंट्स में भी भारी कमियां उजागर हुई हैं। एक बेटामेथासोन वैलेरेट ऑइंटमेंट में सक्रिय दवा की मात्रा महज 73.7% और एक अन्य क्रीम में क्लोरहेक्सिडिन की मात्रा केवल 51.5% ही पाई गई। वहीं कंपाउंड सोडियम लैक्टेट इंजेक्शन के दो अलग-अलग बैच स्टेरिलिटी टेस्ट में फेल रहे, जबकि कई अन्य इंजेक्शन pH, पार्टिकुलेट मैटर, अस्से और क्लैरिटी टेस्ट में असफल साबित हुए। इसके साथ ही खून की कमी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली फेरस एस्कॉर्बेट और फोलिक एसिड की गोलियों के अलावा कैल्शियम-विटामिन D3, मिथाइलकोबालाबिन और जिंक जैसे आवश्यक विटामिन कॉम्बिनेशन भी अमानक पाए गए हैं। अनजाने में इन घटिया दवाओं के इस्तेमाल से मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल असर पड़ने और जान का जोखिम होने की आशंका जताई जा रही है।

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