CBI का कालका में एक्शन: रिटायर्ड ट्रैकमैन का भत्ता रोकने वाले क्लर्क को 10 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा
अभिकान्त, 05 जून चंडीगढ़/कालका: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की चंडीगढ़ एंटी करप्शन ब्रांच ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कालका रेलवे स्टेशन पर तैनात एक क्लर्क को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी क्लर्क रेलवे के ही एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के लंबित भत्ते की राशि जारी करने के एवज में 10 हजार रुपए की रिश्वत ले रहा था। आरोपी की पहचान कालका रेलवे स्टेशन पर तैनात क्लर्क रजनीश के रूप में हुई है। सीबीआई ने उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धारा 7 के तहत नियमित मामला दर्ज कर उसे सलाखों के पीछे भेज दिया है।
सीबीआई में दर्ज FIR के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के मूल निवासी और वर्तमान में मोहाली के साईं माजरा में रह रहे हिमांशु सिंह की शिकायत पर की गई है। हिमांशु के पिता सुंदर 31 अगस्त 2023 को हिमाचल प्रदेश के टकसाल रेलवे स्टेशन से ट्रैकमैन के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
अप्रैल 2026 में पीड़ित परिवार को पता चला कि पहाड़ी क्षेत्रों में तैनात रहे कर्मचारियों को टफ लोकेशन अलाउंस (टीएलए) का बकाया भुगतान किया जा रहा है, जो सुंदर को नहीं मिला था। एरियर के भुगतान के लिए 18 अप्रैल 2026 को कालका रेलवे स्टेशन स्थित वरिष्ठ सेक्शन इंजीनियर (पी-वे) कार्यालय में आवेदन दिया गया। भुगतान लटकने पर हिमांशु ने 4 मई को क्लर्क रजनीश से फोन पर संपर्क किया, जिसने उसे अगले दिन दफ्तर बुलाया। 5 मई 2026 को जब हिमांशु दफ्तर पहुंचा, तो क्लर्क रजनीश ने बताया कि उसके पिता का करीब 74 हजार रुपए का एरियर बकाया है। रजनीश ने फाइल आगे बढ़ाने और कागजी कार्रवाई करने के बदले पहले 14 हजार रुपए मांगे। हिमांशु द्वारा असमर्थता जताने पर सौदा 10 हजार रुपए में तय हुआ। क्लर्क ने साफ चेतावनी दी कि यदि पैसे नहीं मिले तो एरियर जारी नहीं होने देगा।
परेशान होकर शिकायतकर्ता हिमांशु सिंह ने 29 मई 2026 को चंडीगढ़ सीबीआई के पास अपनी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद देश की शीर्ष जांच एजेंसी ने तुरंत मामले का सत्यापन (वेरिफिकेशन) शुरू किया।
1 जून 2026 को सीबीआई के सब-इंस्पेक्टर मनीष कौशिक ने मामले की गोपनीय जांच की। इस दौरान शिकायतकर्ता और आरोपी क्लर्क के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग की गई, जिसमें आरोपी रजनीश द्वारा बेहद स्पष्ट रूप से 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगने की बात की पुष्टि हो गई। रिकॉर्डिंग में आरोपी घूस की रकम एक भी रुपया कम करने को तैयार नहीं था।
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