पेंशनरों को बड़ी राहत: चंडीगढ़ पुलिस के 5 पूर्व कर्मचारियों से हुई पैसों की वसूली रद्द, 8 हफ्ते में मिलेगा रिफंड
चंडीगढ़, 01 मार्च (अभी) : सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (सीएटी) की चंडीगढ़ बेंच ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए चंडीगढ़ पुलिस के पांच सेवानिवृत्त ग्रुप-सी कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। ट्रिब्यूनल ने विभाग द्वारा इन कर्मचारियों की 'डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी' (DCRG) से की गई अतिरिक्त भुगतान की वसूली को न केवल अनुचित माना, बल्कि इसे पूरी तरह से अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि रिटायरमेंट के बाद इस तरह की वसूली नियमों और मानवीय आधार के खिलाफ है।
अधिकारियों को 8 सप्ताह का अल्टीमेटम ट्रिब्यूनल ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि आवेदकों से वसूली गई पूरी रकम को जीपीएफ (GPF) दर पर मिलने वाले ब्याज के साथ वापस किया जाए। इस आदेश के पालन के लिए प्रशासन को 8 सप्ताह का समय दिया गया है। यह मामला चंडीगढ़ पुलिस के रिटायर्ड इंस्पेक्टरों सुरजीत सिंह, हरदेव सिंह, जसबीर सिंह, करमबीर और केशो राम से जुड़ा है, जिनकी आयु वर्तमान में 61 से 64 वर्ष के बीच है। इन सभी ने साल 1983 में कांस्टेबल के रूप में सेवा शुरू की थी और अपनी मेहनत के बल पर इंस्पेक्टर के पद तक पहुंचे थे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का बना आधार सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने आवेदकों की उस दलील को स्वीकार किया जिसमें कहा गया था कि रिटायरमेंट के समय उन्हें विधिवत 'अनापत्ति प्रमाणपत्र' (NOC) जारी किया गया था। ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले को सुप्रीम कोर्ट के 'रफीक मसीह' और 'थॉमस डेनियल' जैसे लैंडमार्क मामलों पर आधारित किया है। इन फैसलों में शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा है कि यदि विभाग की किसी गलती के कारण कर्मचारी को अधिक वेतन या लाभ मिल गया है और कर्मचारी ने इसमें कोई धोखाधड़ी नहीं की है, तो रिटायरमेंट के वक्त या उसके बाद उस राशि की वसूली नहीं की जा सकती।
यह फैसला उन सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी उम्मीद की किरण है, जो सेवानिवृत्ति के अंतिम पड़ाव पर प्रशासनिक चूकों के कारण आर्थिक कटौती का सामना करते हैं। ट्रिब्यूनल के इस आदेश ने एक बार फिर स्थापित किया है कि कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति लाभों पर उनका कानूनी अधिकार है और इसे बिना ठोस कानूनी आधार के छीना नहीं जा सकता।
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