आम आदमी पार्टी ने पंजाब में इमरजेंसी लगाई:- ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज

लोकतंत्र और प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला- पंजाब में आप सरकार इमरजेंसी जैसा माहौल बना रही:- अनिल विज

विभिन्न विभागों की कार्रवाई से प्रेस की आज़ादी को कुचला और लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा:- विज

चण्डीगढ, 16 जनवरी - हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने आज पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार को आडे हाथों लिया और कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने पंजाब में इमरजेंसी लगा दी है और लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है।

विज ने आज एक्स पर (पहले टवीट) पर लिखा कि ‘‘जिस प्रकार से पंजाब में ‘पंजाब केसरी’ एक निष्पक्ष समाचार पत्र समूह तथा इससे जुड़े संस्थानों पर पंजाब सरकार द्वारा भिन्न - भिन्न विभागों के माध्यम से बिना किसी आधार और बिना निर्धारित तरीकों द्वारा नाजायज हमला बोल कर परेशान किया जा रहा है उससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा इमरजेंसी लगा दी गई है। लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है’’।

सनद रहे कि गत दिवस पंजाब केसरी ग्रुप द्वारा पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाब चन्द कटारिया को एक पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया है कि पिछले कुछ दिनों से पंजाब सरकार किसी बाहरी उद्देश्य से पंजाब केसरी समूह और उससे जुड़ी संस्थाओं को विशेष रूप से निशाना बना रही है, जिसका उद्देश्य प्रेस को भयभीत करना प्रतीत होता है।

विज ने इस हालिया घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता लोकतंत्र का मूल स्तंभ है और किसी भी प्रकार का दबाव, भय या प्रताड़ना अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि किसी मीडिया संस्थान को योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया जाना गलत है। उन्होंने कहा कि पंजाब केसरी समूह एक प्रतिष्ठित समाचार संस्थान है, जिसने कठिन परिस्थितियों में भी निर्भीक पत्रकारिता की मिसाल कायम की है। उन्होंने स्मरण कराया कि स्व. लाला जगत नारायण और स्व. रमेश चंद्र जैसे महान पत्रकारों ने देश और समाज के लिए अपने प्राणों तक की आहुति दी, और उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए यह समूह दशकों से जनहित में कार्य कर रहा है।

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि यदि किसी भी राज्य में अलग-अलग विभागों द्वारा एक ही समय में बार-बार कार्रवाई की जाती है और उससे यह संदेश जाता है कि मीडिया को डराने या उसकी आवाज दबाने का प्रयास हो रहा है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून अपना काम करे, लेकिन उसका दुरुपयोग किसी को डराने या चुप कराने के लिए नहीं होना चाहिए। श्री विज ने कहा कि प्रशासनिक कार्रवाई और प्रेस की स्वतंत्रता के बीच एक स्पष्ट रेखा होनी चाहिए। यदि किसी संस्था के विरुद्ध कोई तथ्यात्मक या कानूनी विषय है, तो उसकी जांच नियमों के तहत होनी चाहिए, न कि ऐसे तरीके से जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रश्नचिह्न लगे।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी माहौल में विशेष रूप से यह ज़रूरी हो जाता है कि मीडिया स्वतंत्र, निर्भीक और निष्पक्ष रूप से अपना कार्य कर सके, क्योंकि जनता तक सही जानकारी पहुँचाना मीडिया की जिम्मेदारी है और लोकतंत्र की मजबूती उसी पर निर्भर करती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस गंभीर विषय को लेकर यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रेस की स्वतंत्रता, गरिमा और सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता न हो। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकारें बदल सकती हैं, लेकिन स्वतंत्र मीडिया का सम्मान हमेशा बना रहना चाहिए।

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