पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मोहाली के 16 गांवों में निर्माण और प्रॉपर्टी ट्रांसफर पर लगी तत्काल रोक
अभिकान्त, 24 जुलाई चंडीगढ़ : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ से सटे मोहाली (साहिबजादा अजीत सिंह नगर) जिले के पर्यावरणीय रूप से बेहद संवेदनशील शिवालिक तलहटी क्षेत्र को बचाने के लिए एक सख्त और ऐतिहासिक आदेश जारी किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायाधीश रोहित कपूर की खंडपीठ ने मोहाली जिले के 16 प्रमुख गांवों में हर तरह की निर्माण गतिविधियों, विकास कार्यों और संपत्ति के किसी भी प्रकार के हस्तांतरण पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट के आदेशानुसार जिन 16 गांवों में सभी प्रकार के निर्माण, विकास कार्य, भूमि हस्तांतरण, म्यूटेशन और जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी या पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए जमीन-प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री पर रोक लगाई गई है, उनमें करोरां, नाडा, परछ, सुंक, माजरियां, छोटी बड़ी नागल, परोल, सिसवां, पल्लनपुर, सैनी माजरा, दुलवां, बुराना, गोचर, मिर्जापुर, तारापुर और सुल्तानपुर शामिल हैं। अदालत ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि इस आदेश का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति या अधिकारी के खिलाफ कोर्ट की अवमानना के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए टिप्पणी की कि वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पंजाब सरकार ने आज तक इन क्षेत्रों की वन भूमि का विधिवत सीमांकन नहीं किया है। अदालत ने कहा कि राजस्व अभिलेखों में प्रथम दृष्टया ये क्षेत्र वन भूमि के रूप में दर्ज हैं, फिर भी जिस तरह से शिवालिक की तलहटी वाले इस अत्यंत संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्र का व्यावसायीकरण किया जा रहा है, वह न केवल पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम, 1900 की भावना के खिलाफ है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में राज्य सरकार की विफलता को भी दर्शाता है।
पर्यावरण की रक्षा के लिए हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों को कड़े समयबद्ध निर्देश जारी किए हैं। पंजाब के मुख्य सचिव को वन और राजस्व अधिकारियों की एक संयुक्त टीम गठित करने का निर्देश दिया गया है, जिसका नेतृत्व मुख्य वन संरक्षक करेंगे। यह टीम अगले छह सप्ताह के भीतर वर्ष 1980 के वन संरक्षण अधिनियम के समय उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर वास्तविक वन भूमि की पहचान और सीमांकन करेगी।
इसके साथ ही मुख्य सचिव को एक सप्ताह के भीतर इन 16 गांवों के सभी राजस्व रिकॉर्ड की प्रतियां हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा कराने और सीमांकन पूरा होने तक किसी भी नई म्यूटेशन प्रविष्टि पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर 2026 को तय की गई है, जिसमें मोहाली के उपायुक्त को संबंधित मूल रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहने का हुक्म दिया गया है।
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