15/02/26

यमुनानगर फायरिंग केस: अस्पताल से छुट्टी के बाद बदमाशों की कोर्ट में पेशी, रिमांड के दौरान खुलेंगे रंगदारी और गैंग कनेक्शन के राज

जे कुमार यमुनानगर, 15 फरवरी 2026: यमुनानगर के सिटी मॉल और एक निजी अस्पताल में अंधाधुंध फायरिंग कर दहशत फैलाने वाले तीनों बदमाशों को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। पुलिस मुठभेड़ के दौरान घायल हुए इन आरोपियों को आज भारी सुरक्षा के बीच अदालत में पेश किया जाएगा। एडिशनल एसपी अमरिंदर सिंह ने बताया कि पुलिस इन तीनों का रिमांड मांगेगी ताकि वारदात के पीछे छिपे विदेशी नेटवर्क और स्थानीय साजिशकर्ताओं का पर्दाफाश किया जा सके।

पूछताछ में आरोपियों ने दी गलत जानकारी, जांच भटकाने की कोशिश

अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान आरोपियों ने पुलिस को गुमराह करने का पूरा प्रयास किया। मुख्य आरोपी गुरलाल ने खुद को कुरुक्षेत्र का निवासी बताया था, लेकिन पुलिस जांच में वह पंजाब के समाना का रहने वाला निकला। इसी तरह, करनाल के तरावड़ी निवासी नितिन और सागर ने खुद को नाबालिग बताकर कानूनी राहत पाने की कोशिश की, परंतु दस्तावेजों की जांच में दोनों बालिग पाए गए। अब पुलिस इन आरोपियों से सख्ती से पूछताछ करने की तैयारी में है।

मुठभेड़ की वो खौफनाक सुबह: 30 राउंड फायरिंग और बुलेटप्रूफ जैकेट ने बचाई जान

शनिवार रात करीब 11 बजे रेलवे रोड स्थित अस्पताल में 14 राउंड और फिर सिटी मॉल के बाहर फायरिंग करने के बाद ये बदमाश फरार हो गए थे। पुलिस ने तुरंत नाकाबंदी की और रविवार सुबह 5 बजे गांव सुड़ैल के पास इन्हें घेर लिया।

  • मुठभेड़: दोनों तरफ से करीब 25-30 राउंड गोलियां चलीं।

  • घायल: जवाबी कार्रवाई में दो बदमाशों के पैरों में गोली लगी, जबकि तीसरा बाइक से गिरकर घायल हो गया।

  • सुरक्षा: सीआईए-2 इंचार्ज राकेश को दो और सीआईए-1 इंचार्ज राजकुमार को एक गोली लगी, लेकिन बुलेटप्रूफ जैकेट की वजह से दोनों अधिकारी सुरक्षित रहे।

विदेशी कनेक्शन और रंगदारी का जाल

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह पूरी वारदात विदेश में बैठे भगोड़े गैंगस्टरों के इशारे पर अंजाम दी गई थी। वारदात के बाद हमलावरों ने गैंगस्टरों के नाम की पर्चियां भी फेंकी थीं ताकि व्यापारियों में दहशत फैलाई जा सके। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो पिस्तौल और चार मोबाइल फोन बरामद किए हैं।

आगे की जांच के मुख्य बिंदु

पुलिस रिमांड के दौरान मुख्य रूप से इन सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश करेगी:

  • आरोपियों को हथियार और बाइक किसने उपलब्ध कराई?

  • विदेश में बैठे गैंगस्टरों से इनका संपर्क किस माध्यम से हुआ?

  • क्या इस हमले का मकसद किसी पुरानी रंगदारी की मांग को मनवाना था?

  • शहर में इनके और कौन-कौन से मददगार (Sleeper Cells) सक्रिय हैं?

साइबर और क्राइम यूनिट अब आरोपियों के सोशल मीडिया संपर्कों और मोबाइल डेटा की गहनता से जांच कर रही है ताकि इस संगठित अपराध के पूरे ढांचे को ध्वस्त किया जा सके।

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