विश्व श्रवण दिवस: नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों ने 'स्किट' के जरिए सिखाया कान की सेहत का महत्व; PMO डॉ. पूजा ने किया जागरूक
जे कुमार अम्बाला, 3 मार्च 2026: "बहरापन अभिशाप नहीं, यदि समय पर हो पहचान और सही उपचार"—इसी संदेश के साथ आज अम्बाला के नागरिक अस्पताल में 'विश्व श्रवण दिवस' (World Hearing Day) मनाया गया। पीएमओ डॉ. पूजा पेंटल की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आमजन को सुनने की क्षमता के प्रति जागरूक करना और कान की बीमारियों के शुरुआती लक्षणों के प्रति सचेत करना था। इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित थीम "समुदायों से कक्षाओं तक: सभी बच्चों के लिए श्रवण देखभाल" पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
डॉक्टरों ने अभिनय से दिया 'सुरक्षित सुनने' का संदेश
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ द्वारा प्रस्तुत किया गया एक विशेष 'स्किट' (लघु नाटिका) रहा। इस नाटक के माध्यम से डॉ. शीलकांत पजनी, डॉ. मोनिका नकरा, डॉ. निधि सिंह, डॉ. चेतना, डॉ. उमंग, डॉ. रवि और डॉ. नितिन ने बहुत ही रोचक अंदाज में बताया कि कैसे आज की युवा पीढ़ी हेडफोन का अत्यधिक प्रयोग और तेज आवाज में संगीत सुनकर अपनी सुनने की शक्ति खो रही है।
डॉक्टरों ने अपने अभिनय के जरिए दिखाया कि अक्सर लोग कान में नुकीली चीजें डाल लेते हैं या बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी तेल या दवाई डाल देते हैं, जो पर्दे को नुकसान पहुंचा सकती है। स्किट के अंत में सभी डॉक्टरों ने सामूहिक रूप से संदेश दिया कि कान की सफाई के लिए ईयर-बड्स का उपयोग करने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।
जल्दी पहचान है सबसे बड़ा बचाव: डॉ. पूजा
पीएमओ डॉ. पूजा पेंटल ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि श्रवण शक्ति का कम होना केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं है, बल्कि अब बच्चे और युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों में यदि बोलने या सीखने में देरी हो रही है, तो यह सुनने की क्षमता में कमी का संकेत हो सकता है। यदि इसका सही समय पर पता चल जाए, तो आधुनिक चिकित्सा पद्धति और हियरिंग एड्स (श्रवण यंत्रों) की मदद से व्यक्ति एक सामान्य जीवन जी सकता है।
कान की देखभाल के लिए कुछ महत्वपूर्ण टिप्स:
60-60 का नियम: हेडफोन का वॉल्यूम 60% से कम रखें और हर 60 मिनट बाद ब्रेक लें।
स्वच्छता: कान में माचिस की तीली, पेन या कोई भी नुकीली चीज न डालें।
नियमित जांच: यदि कान में भारीपन, घंटियों की आवाज या कम सुनाई दे, तो तुरंत ईएनटी (ENT) विशेषज्ञ से मिलें।
इस अवसर पर अस्पताल का अन्य स्टाफ भी मौजूद रहा, जिन्होंने पोस्टर और नारों के माध्यम से मरीजों को जागरूक किया। कार्यक्रम के अंत में सभी ने शपथ ली कि वे न केवल अपने कानों की सुरक्षा करेंगे, बल्कि समाज में भी इसके प्रति जागरूकता फैलाएंगे।
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