7.7 लाख करोड़ का टर्नओवर, पर MD की सैलरी सिर्फ ₹17,000! राजेश एक्सपोर्ट्स पर ED का बड़ा शिकंजा

नई दिल्ली, 25 जून (अन्‍नू): देश की दिग्गज सोने और बहुमूल्य धातुओं के कारोबार से जुड़ी कंपनी 'राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड' और उससे जुड़े लोगों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिकंजा कस दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 के प्रावधानों के उल्लंघन के संदेह में बेंगलुरु और मुंबई स्थित 9 विभिन्न ठिकानों पर सघन तलाशी और जब्ती अभियान (Search and Seizure) चलाया है। यह कार्रवाई 23 जून 2026 से शुरू होकर लगातार जारी है।

ईडी (ED) की प्रेस रिलीज के अनुसार जांच में सामने आई ये 5 बड़ी और गंभीर गड़बड़ियां:

ईडी की प्रेस रिलीज के अनुसार, शुरुआती जांच में कंपनी के कामकाज और खातों में कई बेहद संदिग्ध और गंभीर वित्तीय अनियमितताएं पाई गई हैं, जो इस प्रकार हैं:

1. विदेशी लेनदेन और अफ्रीकी खदानों के निवेश का रिकॉर्ड गायब

राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड अपने विदेशी लेन-देन, आयात-निर्यात, विदेशी निवेश और विदेशी व्यापार से जुड़े बही-खातों का कोई पुख्ता दस्तावेज ईडी के सामने पेश करने में पूरी तरह नाकाम रही। इसके चलते इन लेन-देन की सत्यता की जांच करना लगभग असंभव हो गया है। उदाहरण के लिए, कंपनी द्वारा अफ्रीकी खदानों (African Mines) में किए गए 1,035 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश का कोई समकालीन रिकॉर्ड या दस्तावेज कंपनी के पास मिला ही नहीं है और न ही कंपनी अब तक इसे उपलब्ध करा पाई है।

2. 3000 करोड़ रुपये का संदिग्ध ओपेक नेटिंग (Opaque Netting) खेल

जांच में सामने आया है कि कंपनी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और अन्य विदेशी क्षेत्रों में स्थित कई बेहद संदिग्ध पक्षों (Foreign Parties) के साथ लगभग 3,000 करोड़ रुपये के बड़े विदेशी व्यापार प्राप्तियों (Receivables) और भुगतानों (Payables) को आपस में ही सेट-ऑफ (एडजस्ट) करने के अपारदर्शी खेल में शामिल रही है।

3. फिजिकल स्टॉक वेरिफिकेशन में 40% की भारी विसंगति

जब ईडी की टीमों ने कंपनी के परिसरों और फैक्ट्रियों में मौजूद वास्तविक स्टॉक (Physical Stock) की भौतिक रूप से गिनती और जांच की, तो फैक्ट्री के रजिस्टरों में दर्ज स्टॉक और मौके पर मिले स्टॉक के बीच लगभग 40 प्रतिशत का भारी अंतर (Discrepancy) पाया गया, जो कि एक बहुत बड़े स्टॉक घोटाले की ओर इशारा करता है।

4. 7.7 लाख करोड़ के टर्नओवर वाली कंपनी में MD की सैलरी सिर्फ ₹17,000!

ईडी की प्रेस रिलीज में सबसे चौंकाने वाला खुलासा कंपनी के शीर्ष अधिकारियों को मिलने वाले वेतन (Remuneration) को लेकर हुआ है, जो सामान्य व्यावसायिक तौर-तरीकों से बिल्कुल अलग है। जहां एक तरफ कंपनी का समेकित राजस्व (Consolidated Revenue) लगभग 7.7 लाख करोड़ रुपये रिपोर्ट किया गया है, वहीं:

  • कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) को साल 2020 से अब तक कोई वेतन (Salary) ही नहीं दिया गया है।

  • कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) को इतने विशालकाय साम्राज्य के प्रबंधन के लिए महज 17,000 रुपये प्रति माह की सैलरी दी जा रही है, जो पूरी तरह संदिग्ध है।

5. शेयर मैनिपुलेशन और ₹6000 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग

जांच में राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के शेयरों में कुछ खास व्यक्तियों द्वारा किए गए संदिग्ध ब्लॉक ट्रेड और 'शेयर-मैनिपुलेशन' (शेयरों के भाव में हेरफेर) का भी खुलासा हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि इस खेल में शामिल कुछ लोगों के नाम इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) द्वारा लीक किए गए डेटा में भी शामिल हैं, जिनकी विदेशी कड़ियों की जांच की जा रही है। जांच में सामने आया कि एनआरआई बेनामीदारों (NRI Benamidars) का इस्तेमाल करके शेयर मैनिपुलेशन के जरिए 600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भारत से बाहर अवैध रूप से भेजी गई (Siphoned Out)।

डिजिटल सबूत और दस्तावेज जब्त, जांच जारी

ईडी ने अपनी प्रेस रिलीज के अंत में स्पष्ट किया है कि इस लंबी छापेमारी और तलाशी अभियान के दौरान कंपनी के ठिकानों से कई तरह के आपत्तिजनक दस्तावेज, बही-खाते और डिजिटल साक्ष्य (Digital Evidences) बरामद कर जब्त कर लिए गए हैं, जिनकी इस समय बारीकी से फॉरेंसिक जांच की जा रही है। मामले में आगे की कानूनी तफ्तीश और जांच की प्रक्रिया अभी जारी है।

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