03/05/25

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष वियतनाम के हो ची मिन्ह शहर पहुंचे

आरएस अनेजा, 03 मई नई दिल्ली

एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उपलब्धि के रूप में, भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष आज भारत से एक विशेष विमान द्वारा हो ची मिन्ह सिटी पहुंचे। इसके साथ ही 6 से 8 मई, 2025 तक वियतनाम में मनाए जाने वाले संयुक्त राष्ट्र वेसाक दिवस समारोह का शुभारंभ हो गया है।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और आंध्र प्रदेश के मंत्री कंडुला दुर्गेश के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भिक्षु और वरिष्ठ अधिकारी भी भारत के सारनाथ से पवित्र अवशेषों को साथ लेकर पहुंचे हैं। वियतनाम सरकार और वियतनाम बौद्ध संघ ने आगमन पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया, जो दोनों देशों को एकजुट करने वाले गहन और साझा आध्यात्मिक मूल्यों को प्रदर्शित करता है।

पवित्र अवशेषों को औपचारिक प्रार्थना के बाद थान ताम मठ में श्रद्धापूर्वक स्थापित किया गया। शांति और मित्रता के प्रतीकात्मक संकेत के रूप में, वियतनाम बौद्ध विश्वविद्यालय में भारत से लाया गया एक पवित्र बोधि वृक्ष का पौधा भी लगाया गया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल और वियतनामी संघ के नेताओं ने एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया। इसमें केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत के लोगों की ओर से एक हार्दिक संदेश दिया। वियतनाम सरकार ने इस पवित्र कार्य के लिए अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की, जो दोनों देशों के बीच स्थायी सभ्यतागत और आध्यात्मिक संबंधों का प्रतीक है।

पवित्र अवशेषों को भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय संग्रहालय और अंतर्राष्ट्रीय बुद्ध परिसंघ के सहयोग से प्रदर्शित किया जा रहा है। इन्हें 7 मई, 2025 तक हो ची मिन्ह शहर में जनता के लिए प्रदर्शित किया जाएगा, उसके बाद 21 मई, 2025 तक ताई निन्ह, हनोई और हा नाम में प्रदर्शित किया जाएगा।

पवित्र अवशेषों को एक भव्य सार्वजनिक शोभा यात्रा के माध्यम से थान ताम पैगोडा लाया गया, जहाँ उन्हें सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए रखा जाएगा। समारोह के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएँगे, जिसमें विशेष रूप से तैयार की गई प्रदर्शनी और भगवान बुद्ध के जीवन पर आधारित नृत्य-नाटिका शामिल है, जो भारत-वियतनाम बौद्ध विरासत की गहरी जड़ों को प्रदार्शित करता है।

पवित्र अवशेष 2 मई से 21 मई, 2025 तक वेसाक दिवस स्मरणोत्सव के भाग के रूप में वियतनाम में रहेंगे, जिससे लोगों के बीच संबंधों को मजबूती मिलेगी और भगवान बुद्ध के शांति, करुणा और सद्भाव के संदेश का सम्मान होगा।

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