24/06/26

हिमाचल में जान जोखिम में डाल रहे टूरिस्ट: नदियों के किनारे सेल्फी का जानलेवा क्रेज; मानसून में अचानक बढ़ रहा है वाटर लेवल

शिमला, 24 जून (अन्‍नू): पहाड़ों की रानी हिमाचल प्रदेश में मानसून की दस्तक के साथ ही ब्यास, रावी और चिनाब जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। इस बीच, प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर घूमने आ रहे सैलानी ब्यास सहित अन्य नदियों के बिल्कुल किनारे और तेज बहाव के बीच पहुंचकर सेल्फी लेने व रील्स-फोटो खिंचवाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।

रोमांच और सोशल मीडिया पर चंद लाइक्स के चक्कर में की जा रही यह थोड़ी सी लापरवाही कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे खतरनाक स्टंट और फोटो खिंचवाते टूरिस्टों के कई वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं, जो बेहद चिंताजनक हैं।

प्रशासन के साइन बोर्ड और एडवाइजरी को कर रहे नजरअंदाज

नदियों के पास बढ़ते हादसों को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा जगह-जगह साइन बोर्ड लगाए गए हैं और एडवाइजरी जारी की जा रही है, लेकिन पर्यटक इन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे हैं:

  • स्थानीय लोगों की भी नहीं सुन रहे: केवल प्रशासन ही नहीं, बल्कि नदी किनारे रहने वाले स्थानीय (लोकल) लोग भी अक्सर टूरिस्टों को नदी के पास जाने से रोकते हैं और दूरी बनाने को कहते हैं, लेकिन सेल्फी और रोमांच के चक्कर में टूरिस्ट इन खतरों और चेतावनियों को हंसकर टाल देते हैं।

  • पहाड़ी नदियों का धोखा: पहाड़ी क्षेत्रों में नदियाँ ऊपर से देखने में भले ही शांत और सामान्य लगती हैं, लेकिन अंदर पानी का बहाव (करंट) बेहद तेज और जानलेवा होता है। पहाड़ी भूगोल के कारण कब पानी का बहाव अचानक बढ़ जाए, इसका अंदाजा लगाना नामुमकिन होता है।

डैम से पानी छोड़े जाने के कारण अचानक बढ़ रहा जलस्तर

प्रदेश में मानसून सीजन की शुरुआत को देखते हुए इन दिनों विभिन्न हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स (जल विद्युत परियोजनाओं) के बांधों से लगातार अतिरिक्त पानी छोड़ा जा रहा है। बांधों (डैम) में बरसात के दौरान किसी भी बड़े खतरे या सिल्ट की समस्या से बचने के लिए पानी की फ्लशिंग (सफाई) की जा रही है।

ऐसे में बांधों से बिना किसी पूर्व चेतावनी के पानी छोड़े जाने के बाद नीचे बहने वाली नदियों का जलस्तर अचानक कई फीट तक बढ़ जाता है। ऐसे समय में नदी किनारे या पत्थरों पर मौजूद लोगों के लिए यह स्थिति पल भर में काल का रूप ले सकती है।

याद दिलाया साल 2014 का वो खौफनाक 'लारजी डैम हादसा'

हिमाचल प्रदेश में नदियों के किनारे लापरवाही बरतने का एक ऐसा कभी न भूलने वाला काला इतिहास रहा है, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था:

  • 24 छात्र-छात्राएं बह गए थे: साल 2014 में मंडी जिले के लारजी जल विद्युत परियोजना के डैम से अचानक पानी छोड़े जाने के बाद थलोट में हैदराबाद के एक इंजीनियरिंग कॉलेज के 24 छात्र-छात्राएं ब्यास नदी के तेज बहाव में बह गए थे। इस दर्दनाक हादसे में 18 छात्र और 6 छात्राएं शामिल थीं।

  • हाल ही में टला बड़ा हादसा: इसी तरह का एक ताजा वाकया बीती 8 जून को भी सामने आया, जब कुल्लू के मणिकर्ण में पंजाब के एक ही परिवार के तीन सदस्य पानी के तेज बहाव की चपेट में आ गए थे। हालांकि, गनीमत यह रही कि स्थानीय लोगों की मुस्तैदी और बहादुरी के कारण समय रहते उन तीनों की जान बचा ली गई।

सावधानी बरतें पर्यटक, जिंदगी से कीमती कुछ नहीं: डीसी कुल्लू

इस गंभीर स्थिति और लगातार बढ़ रहे खतरे को देखते हुए कुल्लू के उपायुक्त (DC) अनुराग चंद्र ने सख्त लहजे में पर्यटकों और आम जनता के लिए एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने बताया:

  • लगाए जा रहे साइन बोर्ड: जिला प्रशासन बार-बार टूरिस्टों को नदी किनारे न जाने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की चेतावनी दे रहा है। पूरे जिले में नदी किनारे संवेदनशील जगहों पर साइन बोर्ड लगाए गए हैं और जहां फिलहाल बोर्ड नहीं हैं, वहां भी उन्हें तुरंत लगाने के सख्त निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

  • प्रशासन की अपील: डीसी ने पर्यटकों से भावुक और कड़ी अपील करते हुए कहा है कि खूबसूरत नजारों और सेल्फी के कुछ पल किसी की भी जिंदगी से ज्यादा कीमती नहीं हो सकते। चेतावनी वाले क्षेत्रों और डेंजर जोन में जाने से पूरी तरह बचें और जिम्मेदार नागरिक की तरह व्यवहार करें।

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