हरियाणा पुलिस को हाईटेक बनाने की तैयारी: फिंगरप्रिंट विज्ञान और आधुनिक जांच तकनीकों की मिलेगी विशेष ट्रेनिंग; NCRB दिल्ली कराएगा 12 हफ्ते का कोर्स
अभिकान्त, 24 जून, हरियाणा: आधुनिक और साइबर युग के बदलते अपराधों पर लगाम लगाने तथा अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए हरियाणा पुलिस अब पूरी तरह से 'साइंस और तकनीक' का सहारा लेने जा रही है। हरियाणा पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों की वैज्ञानिक जांच क्षमता को मजबूत करने के लिए उन्हें फिंगरप्रिंट विज्ञान (Fingerprint Science) और आधुनिक अपराध जांच तकनीकों की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी।
इसके लिए राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB), नई दिल्ली की ओर से 12 सप्ताह (करीब 3 महीने) का एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह एडवांस कोर्स आगामी 6 जुलाई 2026 से शुरू होकर सितंबर 2026 तक चलेगा, जिसमें हरियाणा पुलिस के चुनिंदा जांच अधिकारियों को दक्ष बनाया जाएगा।
इंस्पेक्टर से लेकर हेड कांस्टेबल तक के अधिकारी कर सकेंगे आवेदन
इस हाईटेक प्रशिक्षण कार्यक्रम का लाभ पुलिसिंग के जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए विभाग ने बड़े स्तर पर आवेदन मांगे हैं:
पात्र श्रेणियां: इस कोर्स के लिए पुलिस विभाग में कार्यरत इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर (SI), सहायक उपनिरीक्षक (ASI) और हेड कांस्टेबल श्रेणी के पात्र व इच्छुक कर्मचारियों से आधिकारिक नामांकन मांगे गए हैं।
दिल्ली में ट्रेनिंग: आवेदन स्क्रूटनी के बाद चयनित किए गए सभी अधिकारियों व जवानों को देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित एनसीआरबी (NCRB) मुख्यालय में भेजा जाएगा, जहां देश के बड़े फोरेंसिक और फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ उन्हें लाइव ट्रेनिंग देंगे।
इन आधुनिक और वैज्ञानिक विषयों पर रहेगा मुख्य फोकस
3 महीने लंबे चलने वाले इस कोर्स के दौरान पुलिस के जवानों को केवल थ्योरी ही नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल स्तर पर डिजिटल पहचान तकनीकों और अपराध जांच में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक वैज्ञानिक विधियों की गहरी जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण में मुख्य रूप से निम्नलिखित विषय शामिल रहेंगे:
NAFIS (नैफिस): नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम का संचालन और डेटा फीडिंग।
डिजिटल फिंगरप्रिंट विश्लेषण: घटनास्थल से मिले धुंधले या आंशिक फिंगरप्रिंट्स को आधुनिक सॉफ्टवेयर के जरिए साफ और मैच करना।
वैज्ञानिक साक्ष्य संग्रहण: क्राइम सीन (वारदात स्थल) को बिना दूषित किए वहां से बाल, खून के धब्बे, फिंगरप्रिंट और अन्य फोरेंसिक साक्ष्य जुटाना और उनका सुरक्षित परीक्षण करना।
फोरेंसिक सहयोग और डेटा विश्लेषण: अपराधियों की डिजिटल पहचान से जुड़ी नई तकनीकों का इस्तेमाल कर केस फाइल को कोर्ट में मजबूत करना।
क्या है नैफिस (NAFIS) तकनीक, जो मिनटों में पकड़ेगी कातिल?
इस ट्रेनिंग का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 'नैफिस' सॉफ्टवेयर होने वाला है। इसके बारे में विस्तार से समझें:
डिजिटल डेटाबेस: यह नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम है, जो देशभर के शातिर और पेशेवर अपराधियों के फिंगरप्रिंट का एक केंद्रीय डिजिटल बैंक है।
चंद मिनटों में पहचान: यदि किसी वारदात स्थल पर कोई अज्ञात फिंगरप्रिंट मिलता है, तो इस सिस्टम की मदद से कुछ ही मिनटों में संदिग्ध या पुराने अपराधी की पहचान स्क्रीन पर आ जाती है, जिससे पुलिस जांच और अपराध नियंत्रण में देशव्यापी मदद मिलती है।
अपराध अनुसंधान को मिलेगा नया आधार, जिलों में मास्टर ट्रेनर बनेंगे ये जवान
हरियाणा पुलिस मुख्यालय का मानना है कि वर्तमान समय में अपराधों की प्रकृति और अपराधियों के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में पारंपरिक पुलिसिंग के बजाय जांच अधिकारियों का तकनीकी रूप से दक्ष होना अनिवार्य हो गया है। यह प्रशिक्षण पुलिस को अकाट्य वैज्ञानिक आधार प्रदान करेगा, जिससे अदालतों में केसों का बेहतर और त्वरित निस्तारण हो सकेगा।
इस ट्रेनिंग की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि एनसीआरबी दिल्ली से प्रशिक्षण प्राप्त करके लौटने वाले अधिकारी अपने-अपने जिलों, रेंज और विशेष इकाइयों (जैसे सीआईए, साइबर सेल) में जाकर अन्य साथी कर्मचारियों को भी इस तकनीक की मास्टर ट्रेनिंग देंगे। इससे पूरे हरियाणा पुलिस तंत्र की जांच क्षमता को एक नया और मजबूत आधार मिलेगा।
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