महर्षि वाल्मीकि जयंती आज, मनुष्यता का दीपक जलाती है उनकी वाणी

आरएस अनेजा, 7 अक्टूबर नई दिल्ली - भारत की सांस्कृतिक, धार्मिक और साहित्यिक धरोहर की आधारशिला में सदियों से ऋषि-मुनियों का अनुपम योगदान रहा है। इन्हीं महान विभूतियों में महर्षि वाल्मीकि का नाम अत्यंत आदर और श्रद्धा से लिया जाता है। उन्हें न केवल सनातन परंपरा में ‘आदि कवि’ (प्रथम कवि) के रूप में प्रतिष्ठा प्राप्त है, बल्कि वे एक ऐसे प्रेरणास्रोत भी हैं जिनका संपूर्ण जीवन आत्म-परिवर्तन और आध्यात्मिक उत्कर्ष का प्रतीक है। वाल्मीकि जयंती, जो उनके जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है, केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह एक अवसर है उनके अप्रतिम योगदान को याद करने, उनकी गहन शिक्षाओं से प्रेरणा लेने और जीवन की कठिनाइयों में उनसे मार्गदर्शन प्राप्त करने का। यह दिन हमें सोचने पर विवश करता है कि किस प्रकार एक साधारण मनुष्य ने दृढ़ निश्चय और साधना के बल से अपने जीवन को नई दिशा दी और विश्व को अमर साहित्यिक कृति प्रदान की।

हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष आश्विन मास की पूर्णिमा को वाल्मीकि जयंती मनाई जाती है। यह दिन अपने आप में विशिष्ट है क्योंकि इसे शरद पूर्णिमा भी कहा जाता है, जब चंद्रमा की शीतल और पवित्र किरणें सम्पूर्ण विश्व को आत्मिक शांति और निर्मलता प्रदान करतीं हैं। वर्ष 2025 में यह वाल्मीकि जयंती आज 7 अक्टूबर, मंगलवार को है और पूरे भारत में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाएगी। विशेष रूप से उत्तर भारत के राज्यों - उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में शोभायात्राओं, भजन-कीर्तन और सामूहिक पूजन का आयोजन भव्य रूप से किया जाएगा।

महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि जीवन के प्रत्येक पहलू का दर्शन है। इसे 'आदि काव्य' की उपाधि इसलिए मिली क्योंकि यह संस्कृत भाषा का प्रथम श्लोकबद्ध महाकाव्य माना जाता है। कहानी कहने की कला में यह एक मील का पत्थर है। लेकिन इसका वास्तविक महत्व इसकी साहित्यिक उत्कृष्टता से कहीं आगे है।

वाल्मीकि जयंती कोई सामान्य सांस्कृतिक उत्सव नहीं है; यह आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और आत्मोन्नति का पर्व है। महर्षि वाल्मीकि ने न केवल एक महाकाव्य की रचना की, बल्कि अपने जीवन से ही यह सिद्ध कर दिया कि मनुष्य की असली पहचान उसके विचारों और कर्मों में निहित है, न कि उसके जन्म अथवा जाति में। उनका जीवन हमें यह प्रेरणा देने के लिए पर्याप्त है कि यदि हम साहस के साथ सही मार्ग का चयन करें, तो न केवल अपने जीवन को सफल बना सकते हैं, बल्कि समाज और विश्व को एक ऐसी अमूल्य धरोहर दे सकते हैं जो युगों-युगों तक मानवता का मार्गदर्शन करती रहे।

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