सोशल मीडिया पर लड़की बनकर ठगी करने वाले 3 नाइजीरियन नोएडा से गिरफ्तार, भारत में अवैध रूप से रह रहे थे आरोपी
जे कुमार गुरुग्राम, 17 मई 2026: गुरुग्राम पुलिस की साइबर क्राइम (वेस्ट) थाना टीम ने सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स पर विदेशी लड़की बनकर भारतीय नागरिकों को अपनी ठगी का शिकार बनाने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने उत्तर प्रदेश के नोएडा में छापेमारी कर तीन नाइजीरियन मूल के नागरिकों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान चिनेदु, जेम्स संडे और जूल्स काकाओ के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से 19 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और 18 भारतीय व अंतरराष्ट्रीय एक्टिव सिम कार्ड बरामद किए हैं। कोर्ट में पेशी के बाद आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
गुरुग्राम पुलिस के प्रवक्ता संदीप तुरान ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि इस रैकेट का पर्दाफाश साइबर क्राइम थाने में 25 अप्रैल 2025 को दर्ज कराई गई एक शिकायत के बाद हुआ। पीड़ित व्यक्ति ने बताया था कि इंस्टाग्राम पर उसकी दोस्ती एक विदेशी महिला से हुई थी। कुछ दिनों तक वॉट्सऐप पर बातचीत करने के बाद उस कथित महिला ने बताया कि वह भारत (मुंबई एयरपोर्ट) पहुँच चुकी है, लेकिन उसके पास मौजूद विदेशी चेक को भारतीय करेंसी में बदलने और फॉरेक्स रजिस्ट्रेशन शुल्क चुकाने के लिए भारतीय रुपयों की जरूरत है। पीड़ित ने झांसे में आकर महिला द्वारा दिए गए बैंक खाते में ₹69,900 ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद जब आरोपियों ने और पैसों की मांग की, तो पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ और उसने पुलिस से संपर्क किया।
साइबर सेल ने जब तकनीकी जांच और बैंक खातों के वित्तीय लेन-देन को ट्रैक किया, तो कड़ियां नोएडा के एक किराये के मकान से जुड़ीं, जहाँ ये तीनों आरोपी पिछले करीब एक साल से एक साथ रहकर इस पूरे नेटवर्क को चला रहे थे। आरोपी विदेशी नंबरों वाले अंतरराष्ट्रीय सिम कार्ड का उपयोग कर वॉट्सऐप चैट करते थे ताकि पीड़ितों को पूरा विश्वास हो सके कि वे सचमुच विदेश से बात कर रहे हैं। ठगी की रकम ट्रांसफर होते ही ये लोग सोशल मीडिया प्रोफाइल डिलीट कर देते थे और पीड़ित का नंबर ब्लॉक कर देते थे।
पुलिस जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि तीनों आरोपी भारत में पूरी तरह अवैध रूप से रह रहे थे। छापेमारी के दौरान इनके पास से कोई वैध वीजा या पासपोर्ट बरामद नहीं हुआ। जूल्स काकाओ 2017 में और चिनेदु 2018 में स्टूडेंट वीजा पर भारत आए थे, लेकिन वीजा की अवधि खत्म होने के बाद भी वे देश में छिपे रहे। वहीं, तीसरा आरोपी जेम्स संडे साल 2022 में बांग्लादेश सीमा के रास्ते अवैध रूप से भारत में दाखिल हुआ था। इस खुलासे के बाद पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं के साथ-साथ पासपोर्ट अधिनियम (Passport Act) और विदेशी अधिनियम (Foreigners Act) की गंभीर धाराएं भी जोड़ दी हैं। पुलिस अब बरामद लैपटॉप और मोबाइल की फॉरेंसिक जांच कर रही है ताकि देश भर में इनके शिकार हुए अन्य पीड़ितों और बैंक खातों के नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
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