03/10/25

कोटा का दशहरा मेला धार्मिक आस्था, संस्कृति और लोक परंपराओं का अद्वितीय संगम

एन.एस.बाछल, 03 अक्तूबर, जयपुर।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि विजयादशमी का पर्व असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का उत्सव है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि सत्य का मार्ग कितना भी चुनौतीपूर्ण हो, समुद्र के समान कितना भी गहरा हो लेकिन समाधान का रामसेतु बन ही जाता है। उन्होंने कहा कि कोटा का दशहरा मेला केवल एक उत्सव नहीं बल्कि राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। 

भजनलाल शर्मा ने गुरूवार को कोटा में लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित 132वें राष्ट्रीय दशहरा मेला में आमजन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह मेला पूरे भारत में अपनी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व के लिए विख्यात है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के दिलों में भी यह मेला एक विशेष स्थान रखता है। उन्होंने कहा कि यह मेला धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक आयोजन, मनोरंजन और लोक परंपराओं का अद्वितीय संगम है। इस बार का दशहरा मेला कई मायनों में विशेष है क्योंकि मेले का आयोजन तिरंगा थीम पर किया गया है जो हमारी सेना के शौर्य और पराक्रम को दर्शाता है।

 

जीएसटी सुधारों से आम आदमी की खुशियां हुईं दोगुनी—

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेले में राजस्थान और अन्य राज्यों के कारीगर अपने पारंपरिक हस्तशिल्प, आभूषण, वस्त्र और सजावटी वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाने के लिए आते हैं। यह बाजार हमारे कुशल कारीगरों की प्रतिभा और राजस्थान की समृद्ध शिल्प परंपरा का उचित मंच है। उन्होंने कहा कि इस बार हमारे शिल्पकारों और कारीगरों में भी नया उत्साह देखने को मिल रहा है क्योंकि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने जीएसटी सुधारों के तहत विभिन्न हस्तशिल्प उत्पादों पर जीएसटी की दर 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी है। इन जीएसटी सुधारों से इस बार त्योहारी सीजन में आम आदमी की खुशियां भी दोगुनी हो गई हैं। उन्होंने कहा कि हम सब प्रदेश को मजबूत और सशक्त बनाने के लिए स्वदेशी उत्पादों को अपनाने का संकल्प लें तथा वोकल फोर लोकल के मंत्र को आत्मसात करें।

राज्य सरकार ने माना नर को नारायण और दीन को देवता—

भजनलाल शर्मा ने कहा कि भगवान श्रीराम ने रावण जैसी बुराइयों का अंत कर रामराज्य की स्थापना की। रामराज्य में समाज में सुख-समृद्धि का वास और खुशहाली का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की संकल्पना निहित होती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने नर को नारायण और दीन को देवता मानते हुए अपने कार्यकाल में महिला, युवा, किसान और गरीब के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है। महिला सुरक्षा तथा महिला सशक्तिकरण के लिए भी राज्य सरकार ने उल्लेखनीय कार्य किए हैं। साथ ही, पंडित दीनदयाल उपाध्याय गरीबी मुक्त गांव योजना शुरू कर 10 हजार गांवों के बीपीएल परिवारों को गरीबी रेखा के ऊपर लाने का काम किया जा रहा है। 

सत्य की राह पर चलकर देश-प्रदेश के विकास में दें योगदान -लोकसभा अध्यक्ष—

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि दशहरा पर्व असत्य पर सत्य की जीत का उत्सव है। श्रीराम ने जनमानस को साथ लेकर अहंकारी राजा रावण के खिलाफ सेना तैयार कर अहंकार और असत्य को पराजित किया। उन्होंने कहा कि इस मौके पर हम सब संकल्प लें कि सत्य और नैतिकता की राह पर चलकर देश-प्रदेश के विकास में अपना योगदान देंगे। 

कोटा दशहरा मेला हमारी परंपरा और संस्कृति का प्रतीक—

ओम बिरला ने कहा कि कोटा का दशहरा मेला ऐतिहासिक होने के साथ ही हमारी परंपरा और संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के स्वदेशी अपनाने के मंत्र का आह्वान करते हुए कहा कि इससे देश आत्मनिर्भर और विकसित बनते हुए समृद्धि और खुशहाली की ओर बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा जीएसटी दरों में कटौती किए जाने से आमजन और स्वदेशी उत्पादकों को लाभ मिल रहा है।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि दशहरा मेले में इस बार प्रदेशवासी जीएसटी बचत उत्सव मनाते हुए बड़ी संख्या में हस्तशिल्प और स्वदेशी उत्पाद खरीद रहे हैं। उन्होंने शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दशहरा मेला हस्तशिल्पियों और स्थानीय कारीगरों के जीवन में नई समृद्धि और खुशहाली लेकर आएगा।

इस दौरान इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स तथा एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के प्रतिनिधि ने 233 फीट के भारत के सबसे बड़े रावण के पुतले के रिकॉर्ड का प्रमाण पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा। इस अवसर पर पूर्व महाराव इज्येराज सिंह ने भगवान लक्ष्मीनारायण के प्रतिनिधि के रूप में परम्परागत रूप से रावण के विशाल पुतले का दहन किया। साथ ही, कार्यक्रम के दौरान भव्य अतिशबाजी की गई जिसे देखकर आमजन रोमांचित हो उठे। 

इससे पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कोटा के गढ़ पैलेस पहुंचने पर पूर्व महाराव इज्येराज सिंह ने दरीखाना में उनका परम्परानुसार अभिनन्दन किया गया। सभी ने एक दूसरे को दशहरा पर्व की शुभकामनाएं दी।

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