28/08/25

लुप्त होते वाद्ययंत्रों का अनुसंधान है भारतीय ज्ञान परंपरा : डॉ. रोहित दत्त

जे कुमार, अम्बाला 28 अगस्त : जी.एम.एन. कॉलेज, अम्बाला छावनी में भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़े लुप्त होते पारंपरिक वाद्ययंत्रों को पुनर्जीवित करने तथा विद्यार्थियों को भारतीय संगीत की अमूल्य धरोहर से जोड़ने के उद्देश्य से भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ एवं संगीत विभाग द्वारा एक विशेष संगीतमय कार्यक्रम का आयोजन किया गया।



इस अवसर पर स्पिक मैके से जुड़े सुप्रसिद्ध कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण रहे पंडित सलील भट्ट, जिन्होंने अपनी अद्वितीय कला के माध्यम से वीणा की मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुति दी। उनकी वीणा के मधुर स्वर और भावपूर्ण रचनाओं ने उपस्थित श्रोताओं को संगीत की गहराइयों में डुबो दिया।



पंडित भट्ट के साथ संगति में प्रसिद्ध तबला वादक कौशिक कुनवर ने ताल और लय का ऐसा अद्भुत संगम प्रस्तुत किया, जिसने संपूर्ण वातावरण को और भी संगीतमय बना दिया।



कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रोहित दत्त ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल विद्यार्थियों को भारतीय संगीत और संस्कृति से जोड़ते हैं, बल्कि उन्हें अपनी जड़ों को समझने और गर्व महसूस करने का अवसर भी प्रदान करते हैं। उन्होंने कलाकारों की उत्कृष्ट प्रस्तुतियों को अद्वितीय बताया और कहा कि ऐसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में भी सहायक होती हैं।



कार्यक्रम का आयोजन एवं मंच संचालन संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. मंजीत कौर द्वारा किया गया। उन्होंने कलाकारों का हार्दिक स्वागत किया और विद्यार्थियों को इस संगीतमय अनुभव से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। इन क्षणों को अपने कैमरे में कैद करने का कार्य कॉलेज के जनसंचार के बी ए प्रथम वर्ष के छात्र रागव एवं बी ए तृतीय वर्ष के छात्र निखिल ने किया।



कार्यक्रम का समापन सामूहिक जुगलबंदी के साथ हुआ, जिसने यह संदेश दिया कि संगीत तभी संपूर्ण होता है, जब परंपरा और आधुनिकता एक साथ चलें।

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