रिलायंस कम्युनिकेशंस बैंक धोखाधड़ी मामला: कोर्ट ने ED की चार्जशीट पर लिया संज्ञान, पूर्व निदेशक पुनीत गर्ग की मुश्किलें बढ़ीं
नई दिल्ली, 16 जून (अन्नू): रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom) और अन्य से जुड़े हाई-प्रोफाइल बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को एक बड़ी कानूनी सफलता मिली है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू के माननीय विशेष न्यायालय (धन शोधन निवारण अधिनियम) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड एवं अन्य के विरुद्ध दायर की गई ईडी की अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) पर विधिवत संज्ञान ले लिया है।
यह चार्जशीट ईडी द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के कड़े प्रावधानों के तहत पुनीत गर्ग और सुश्री वैशाली माने के खिलाफ न्यायालय के समक्ष दाखिल की गई थी।
ED द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुख्य बिंदु:
पूर्व निदेशक पुनीत गर्ग पहले से जेल में: इस पूरे घोटाले में मुख्य आरोपी रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के पूर्व निदेशक पुनीत गर्ग हैं, जिन्हें ईडी ने लंबी पूछताछ के बाद 29 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया था और वे फिलहाल न्यायिक अभिरक्षा (जेल) में बंद हैं।
CBI की 5 एफआईआर (FIR) बनीं आधार: इस मामले की शुरुआत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी की धारा 120-बी, 406 व 420 के तहत दर्ज की गई प्राथमिक संख्या RC0742025E0005 (दिनांक 21.08.2025) से हुई थी। इसके बाद सीबीआई द्वारा दर्ज चार अन्य प्राथमिकियों (RC0742026E0001 से E0004) को भी ईडी ने अपने इस प्रवर्तन मामला सूचना प्रतिवेदन (ECIR) में समाहित कर जांच का दायरा बढ़ाया था।
24 साल तक रिलायंस कम्युनिकेशंस में अहम पदों पर रहे पुनीत गर्ग; मनी ट्रेल उजागर
ईडी की जांच में पुनीत गर्ग का कंपनी में लंबा इतिहास और वित्तीय हेराफेरी में उनकी गहरी संलिप्तता उजागर हुई है:
विभिन्न पदों पर रहे सक्रिय: पुनीत गर्ग वर्ष 2006 से 2013 तक कंपनी में अध्यक्ष के रूप में वैश्विक उद्यम व्यवसाय का दायित्व संभाल रहे थे। इसके बाद 2014 से 2017 तक अध्यक्ष (विनियामक कार्य), अक्टूबर 2017 में कार्यकारी निदेशक और अप्रैल 2019 से अप्रैल 2025 तक कंपनी के गैर-कार्यकारी निदेशक के रूप में कार्यरत रहे।
धोखाधड़ी में सक्रिय भूमिका: ईडी की जांच के अनुसार, पुनीत गर्ग वर्ष 2001 से 2025 तक रिलायंस कम्युनिकेशंस में विभिन्न वरिष्ठ प्रबंधकीय एवं निदेशक पदों पर रहते हुए बैंक धोखाधड़ी से अर्जित अपराध की आय (Proceeds of Crime) को छिपाने, उस पर कब्जा करने, परत-दर-परत (Layering) लेनदेन के माध्यम से उसके मूल स्रोत को गायब करने और फंड के अपसारण (Diversion) में सक्रिय रूप से संलिप्त थे।
बैंकों के पैसे से विदेशों में खरीदीं आलीशान संपत्तियां और लग्जरी नौका
जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने देश के बैंकों से ठगे गए पैसे की जो विदेशी कड़ियां जोड़ी हैं, वे बेहद चौंकाने वाली हैं:
लग्जरी नौका 'टियान' की खरीद: बैंकों से डायवर्ट की गई अपराध की आय का उपयोग यूनाइटेड किंगडम (UK) के जर्सी क्षेत्राधिकार में स्थित एक कंपनी के स्वामित्व वाली 'टियान' (Tian) नामक बेहद विलासितापूर्ण नौका (Yacht) को खरीदने के लिए किया गया।
न्यूयॉर्क के मैनहट्टन में विला: इसके अलावा, इस अवैध धन का एक बड़ा हिस्सा संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के न्यूयॉर्क स्थित पॉश इलाके मैनहट्टन क्षेत्र में एक विलासितापूर्ण आवासीय संपत्ति (लग्जरी विला) के क्रय हेतु उपयोग किया गया।
दिवाला प्रक्रिया के दौरान गुप्त बिक्री: जांच में यह भी सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि रिलायंस अनिल अंबानी समूह की कंपनियों की चल रही निगमित दिवाला समाधान प्रक्रिया (Insolvency Resolution Process) के दौरान इन संपत्तियों को गुप्त और कपटपूर्ण तरीके से बेच दिया गया। इस बिक्री से जो भारी-भरकम धनराशि प्राप्त हुई, उसे वास्तविक और वैध दावेदारों को लौटाने के स्थान पर अवैध रूप से दूसरी जगहों पर अपसारित (डायवर्ट) कर दिया गया।
माननीय विशेष न्यायालय ने 15 जून 2026 को इस पूरे मामले और ईडी की चार्जशीट पर गंभीरता से संज्ञान लिया है। प्रवर्तन निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि रिलायंस अनिल अंबानी समूह से जुड़े इस बड़े बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट की आगामी जांच अभी भी लगातार जारी है और आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी संपत्तियों को कुर्क किया जा सकता है।
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