पलवल: दहेज प्रथा के खिलाफ प्रशासन सख्त; उपायुक्त ने दिए 'दहेज निषेध अधिनियम-1961' को कड़ाई से लागू करने के निर्देश
जे कुमार पलवल, 7 मई 2026: दहेज जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से मिटाने के लिए पलवल जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद, पलवल के उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने जिला अधिकारियों को 'दहेज निषेध अधिनियम-1961' का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
उपायुक्त डॉ. वशिष्ठ ने स्पष्ट किया कि दहेज प्रथा को समाप्त करने के लिए केवल कानून पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज की संकीर्ण मानसिकता को बदलना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि जब तक दहेज को प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाएगा, तब तक इस कुप्रथा का अंत संभव नहीं है। इसके लिए युवाओं को स्वयं आगे आकर दहेज लेने और देने से इनकार करना चाहिए। उन्होंने धार्मिक और सामाजिक संगठनों से भी अपील की कि वे सरल विवाह को बढ़ावा दें और समाज को जागरूक करें।
प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए जिले के सभी एसडीएम को दहेज निषेध अधिकारी नियुक्त किया गया है। कोई भी नागरिक दहेज से संबंधित शिकायत के लिए सीधे संबंधित एसडीएम से संपर्क कर सकता है। उपायुक्त ने बताया कि कानून के तहत दहेज लेना, देना या इसके लिए उकसाना एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध है। इसमें दोषी पाए जाने पर 5 वर्ष तक की कैद और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
बैठक में एसडीएम पलवल भूपेंद्र सिंह, एसडीएम होडल बलीना और एसडीएम हथीन हरि राम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाएं ताकि महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति सजग हो सकें और दहेज के कारण होने वाले उत्पीड़न को रोका जा सके।
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