बैंक धोखाधड़ी मामला: सीबीआई अदालत ने एसबीआई के 2 अधिकारियों समेत 8 दोषियों को सुनाई 10-10 साल की सजा; भारी जुर्माना भी लगाया
चेन्नई/नई दिल्ली, 02 अगस्त (अन्नू): सीबीआई अदालत, चेन्नई ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की चेंगम शाखा से जुड़े एक बैंक धोखाधड़ी मामले में फैसला सुनाते हुए 8 आरोपियों को दोषी ठहराया है। अदालत ने सभी दोषियों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
दोषियों में एसबीआई के दो तत्कालीन अधिकारी और छह निजी व्यक्ति शामिल हैं।
सजा और जुर्माने का विवरण
10 साल की कठोर कैद: अदालत ने सभी 8 दोषियों को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
₹50-50 लाख का जुर्माना: तत्कालीन शाखा प्रबंधक एन. गोपालकृष्णन, तत्कालीन ग्रामीण विपणन व वसूली अधिकारी पी. बालामुरली, आर. वेंकटरमन, एस. रवि और डी. शंकर पर ₹50-50 लाख का जुर्माना लगाया गया है।
₹20-20 लाख का जुर्माना: अन्य दोषियों आर. राजन, पी. पन्नीरसेल्वम और टी. मुरुगन पर ₹20-20 लाख का जुर्माना ठोका गया है।
क्या था पूरा मामला?
मामले की शुरुआत: सीबीआई ने यह मामला 23 सितंबर 2011 को एसबीआई चेंगलपट्टू के क्षेत्रीय प्रबंधक की शिकायत के आधार पर दर्ज किया था।
फर्जी लोन और बैंक को नुकसान: अक्टूबर 2007 से मई 2008 के दौरान, एसबीआई चेंगम शाखा के बैंक अधिकारियों ने 'मेसर्स कांथम्मा मिल्क चिलिंग प्लांट' के प्रोप्राइटर के. पुरूषोथमन के साथ मिलीभगत की। फर्जी आवेदनों और दस्तावेजों के आधार पर 728 डेयरी लोन (कुल राशि ₹2,32,96,000) मंजूर किए गए।
इस धोखाधड़ी के कारण बैंक को कुल ₹1,97,27,692 का भारी नुकसान हुआ था।
जांच और चार्जशीट
सीबीआई ने जांच पूरी कर 25 जून 2013 को चार्जशीट दाखिल की थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान मुख्य साजिशकर्ता के. पुरूषोथमन और पूर्व उप प्रबंधक के. रविचंद्रन का निधन हो गया, जिसके बाद उनके खिलाफ आरोप समाप्त कर दिए गए थे। सुनवाई पूरी होने पर अदालत ने बचे हुए सभी 8 आरोपियों को दोषी मानते हुए यह सजा सुनाई।
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