नागरिक उड्डयन मंत्री नायडू ने एयरोड्रोम विकास के लिए चैलेंज मोड का शुभारंभ किया
आरएस अनेजा, 23 सितंबर नई दिल्ली - नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने आज उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) योजना के अगले चरण के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ 21 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर करके देशभर में क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। ये समझौता ज्ञापन विमानन अवसंरचना के विकास और कम सेवा वाले तथा बिना हवाई संपर्क वाले क्षेत्रों तक हवाई संपर्क के विस्तार के लिए केंद्र-राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव हैं।
नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित द अशोक में आयोजित समारोह का उद्घाटन नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू ने किया।
राम मोहन नायडू किंजरापु ने कहा, “इन समझौता ज्ञापनों के साथ टीम भारत देश के क्षेत्रीय विमानन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए एकजुट होकर काम कर रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित राज्य, विकसित भारत की नींव है और इस यात्रा में प्रत्येक राज्य समान भागीदार है।”
उड़ान के प्रभाव के बारे में मंत्री ने कहा, “शुरू होने के बाद से उड़ान ने 687 मार्गों और 95 एयरोड्रोम को परिचालन में ला दिया है तथा 3.66 लाख से अधिक उड़ानों के माध्यम से लगभग 1.71 करोड़ यात्रियों को यात्रा कराई है। लेकिन मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण आंकड़े इसके प्रभाव से जुड़े हैं। विमानन क्षेत्र में रोजगार 2014 में लगभग 30 लाख से बढ़कर आज करीब 77 लाख हो गया है और 2040 तक इसके 2.5 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश में तेजू और बिहार में पूर्णिया जैसे हवाई अड्डे, जो कभी सैकड़ों किलोमीटर तक हवाई संपर्क से कटे हुए थे, आज क्षेत्रीय समृद्धि के वाहक बन रहे हैं।”
उड़ान के अगले चरण का शुभारंभ 4 जुलाई 2026 को जोधपुर में प्रधानमंत्री द्वारा किए गए उद्घाटन और 16 जुलाई 2026 को आयोजित उड़ान कार्यशाला पर आधारित है। इस कार्यशाला में नागरिक उड्डयन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों ने योजना के अगले चरण की रूपरेखा पर विचार-विमर्श किया था।
राम मोहन नायडू ने आगे कहा, “संशोधित उड़ान चार स्तंभों पर आधारित है; यात्रियों के लिए वहनीयता, परिचालन की सततता, परियोजनाओं के लिए पारदर्शी चैलेंज मोड ढांचा और स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देना। साथ मिलकर हम ‘मेड इन इंडिया’ नागरिक विमानों की व्यापक परिकल्पना की दिशा में एक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रहे हैं। उड़ान का यह अगला चरण हमें इसी दिशा में आगे ले जा रहा है।”
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